Hindi Sex Stories | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru Wed, 14 Nov 2018 16:30:47 +0000 en-US hourly 1 /> अपनी पुस्तक से मुझे अपनी तरफ मोहित कर लिया | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/apni-pustak-se-mujhe-apni-taraf-mohit-kar-liya/ Wed, 14 Nov 2018 16:30:47 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2610 antarvasna, hindi sex stories

मेरा नाम प्रीति है मैं जयपुर की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 21 वर्ष है और मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूं, मैं जिस कॉलेज में पढ़ती हूं उस कॉलेज में मेरे काफी अच्छे दोस्त हैं। मुझे जयपुर में आए हुए अभी दो वर्ष ही हुए हैं क्योंकि मेरे पापा सरकारी नौकरी में है इसलिए उनका ट्रांसफर जोधपुर से जयपुर दो वर्ष पहले हो चुका था और अब हम जयपुर में ही रह रहे हैं। जयपुर में हमारे काफी रिश्तेदार और सगे संबंधी रहते हैं, वह लोग भी कभी हमारे घर आ जाते हैं और कभी मैं अपनी मम्मी के साथ उनके घर चली जाती हूं। मैं पहले से ही जयपुर आती जाती रहती थी इसलिए मुझे जयपुर के बारे में पहले से ही पता था, मुझे जयपुर में एडजेस्ट करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। मैं खुले विचारों की हूं लेकिन शायद मेरे खुले विचार मेरे पिताजी को पसंद नहीं है वह हमेशा ही मुझे किसी ना किसी बात को लेकर डांट देते हैं और कहते हैं कि तुम्हारे यह विचार मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है, उनके और मेरे बीच में ज्यादा बातें नहीं होती, मुझे जब कोई काम होता है तो ही मैं उन्हें कहती हूं।

उनके और मेरे विचार एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत है इसलिए हम दोनों एक दूसरे को बिल्कुल पसंद नहीं करते, मुझे मेरे पिताजी का नेचर कुछ अच्छा नहीं लगता। हमारे पड़ोस में एक सुधांशु जी रहते हैं, वह हमारे मोहल्ले के बड़े ही सख्त किस्म के व्यक्ति हैं, उनसे हमारा पूरा मोहल्ला डरता है, वह छोटी सी बात पर भी सब लोगों को डांट देते हैं इसलिए सब लोग उनसे दूरी बनाकर रखते हैं। सुधांशूजी स्कूल में टीचर हैं लेकिन वह किसी भी एंगल से टीचर नहीं लगते क्योंकि जिस प्रकार का उनका नेचर और बात करने का तरीका है वह बड़ा ही गंदा है, वह लोगों के साथ गाली गलौज भी करते हैं और सब लोगों के साथ बड़ी बदतमीजी से पेश आते हैं। हम लोग  उन्हें एक प्रकार से हमारे मोहल्ले का डॉन भी कहते हैं। उनकी शक्ल और सूरत भी बिल्कुल वैसे ही है वह बड़े से चश्मे लगाते हैं, उनके बाल भी ऊपर की तरफ खड़े रहते हैं और वह अपने सर में इतना ज्यादा तेल लगाते हैं कि बिल्कुल भी ऐसा नहीं प्रतीत होता कि वह टीचर हैं, वह बिल्कुल भी अच्छे व्यक्ति नहीं हैं।

मेरी धारणा उनके लिए ऐसी ही थी लेकिन जब एक दिन मैं उनके साथ बात कर रही थी तो मुझे उनके साथ बात कर के बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह इस प्रकार के व्यक्ति है, वह समाज से थोड़ा हटकर जरूर है लेकिन उनका व्यवहार शायद कहीं ना कहीं ठीक भी है क्योंकि वह किसी को भी गलत काम करने नहीं देते वह उन्हें रोकते हैं इसीलिए शायद सब लोगों ने उन्हें डॉन की उपाधि दे रखी है। मैं जब उनके साथ बात कर रही थी तो वह मुझे बड़ी ही नॉलेज की बातें बता रहे थे और कह रहे थे कि हमारे समाज में बहुत ही गलत भ्रष्टाचार हैं जिसे कि मैं दूर करना चाहता हूं लेकिन सब लोग मेरा विरोध करते हैं और सब लोग मुझे ही गलत ठहराते हैं, शायद इसी वजह से मेरा व्यवहार इतना चिड़चिड़ा हो चुका है और मैं सब लोगों से दूर होने लगा हूं। मैंने उनसे पूछा कि आप ऐसे क्यों हो गए हैं तो उन्होंने मुझे बताया कि मेरे लड़के की जब शादी हुई तो वह बड़ा अच्छा था और कुछ समय तक वह बड़े अच्छे से हमारे साथ रह रहा था लेकिन कुछ समय बाद उसका व्यवहार हमारे लिए बदलने लगा और वह पूरी तरीके से बदल गया। मैंने उनसे पूछा कि ऐसा क्या हुआ कि आप के लड़के का व्यवहार आपके प्रति बदल गया, उन्होंने मुझे बताया की हमने उसे अच्छे स्कूल और कॉलेज में पढ़ाया, मैंने कभी भी उसके लिए कोई कमी नहीं की लेकिन जब से उसकी पत्नी उसके जीवन में आई तब से उसका नेचर ही हमारे प्रति पूरा बदल गया और वह हम पर ही उल्टे आरोप लगाने लगा, हमारे घर पर बहुत ही झगड़े का माहौल रहता था, मैंने उसकी पत्नी को भी कई बार समझाने की कोशिश की परंतु वह हमेशा ही अपना मुंह फुला लेती  और मुझसे बड़े ही गंदे तरीके से बात करती, मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया क्योंकि हमारा एक ही लड़का है और यदि वह हमारे साथ इस प्रकार का व्यवहार करेगा तो शायद हम लोग उसे बर्दाश्त नहीं कर पाए। उसके बाद से  तो मेरा पूरा रवैया बदल गया और मैं समाज के प्रति पूरी तरीके से अपने आप को बदल बैठा हूं, मेरी सोच सिर्फ यही है कि सब लोग अपने परिवार के साथ प्रेम से रहे और सब लोग अपना ध्यान दें लेकिन मैं जब भी किसी को को समझाना चाहता हूं तो वह लोग उल्टा मुझे ही कह देते हैं।

उस दिन मुझे उनके साथ बात करके अच्छा लगा और मुझे भी लगा कि वह इतने भी गलत नहीं है जितने सब लोग उन्हें समझते हैं परंतु सब लोगों की मानसिकता  ही उनके लिए ऐसी बन चुकी है कि वह सबके सामने गलत ही माने जाते है। उसके बाद एक दो बार मैं उनके घर पर भी गई, उनकी पत्नी घर पर ही रहती हैं और वह पहले किसी सरकारी दफ्तर में काम करती थी लेकिन अब उन्होंने नौकरी छोड़ दी है, मुझे नहीं पता था कि मेरा सुधांशु जी के साथ इतना अच्छा संबंध बन जाएगा। वह कॉलोनी में किसी से भी बात नहीं करते थे लेकिन मुझसे वह जरूर बात करते थे और एक दो बार उन्होंने मेरी मदद भी की इसलिए मेरी नजरों में उनकी इज्जत बढ़ गई। एक दिन जब मैं सुधांशु जी के घर पर बैठी हुई थी, उन्होंने मुझे अपनी एक लिखी हुई पुस्तक दिखाइ। उन्होंने मुझे कहा यह पुस्तक मैंने लिखी है, मुझे लगा यह तो बहुत ही विद्वान हैं। सब लोग उनके बारे में बेकार की बातें करते हैं, जब उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा तो मुझे थोड़ा अटपटा सा लगा परंतु मैं भी उनकी तरफ आकर्षित हो गई थी। जब उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रख कर फेरना शुरू किया तो मैं उत्तेजित हो गई, मैं घबरा भी गई थी जब उन्होंने अपने काले से लंड को बाहर निकाला तो पहले मैं थोड़ा हिचक रही थी लेकिन जब मैंने उनके लंड को हाथ में पकड़ा तो वह मुझे कहने लगे तुम मेरे लंड को हिलाना शुरु कर दो।

मैंने उनके लंड को हिलाना शुरू कर दिया मै बड़े अच्छे से उनके लंड को हिलाते रही, कुछ देर बाद मैंने उनके लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मैं जब उनके लंड को चूस रही थी तो मुझे अच्छा लग रहा था, मैंने उनके लंड का काफी देर तक रसपान किया। जब मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया तो मैं पूरी उत्तेजित हो गई मैंने अपने कपड़े उतार दिए। जब मैंने अपने कपड़े उतारे तो वह मुझे कहने लगे अब मैं तुम्हारी चूत मारता हूं। मैंने अपने सारे कपड़े खोल दिए थे, उन्होंने जब मेरी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो मैं उत्तेजित हो गई। उन्होंने मेरी चिकनी योनि के अंदर जैसे ही अपने कड़क और मोटे लंड को डाला तो मैं चिल्ला रही थी और मेरी योनि  से खून बाहर की तरफ निकलने लगा था। उनके अंदर पूरी जवानी बची थी उन्होंने जिस प्रकार से मुझे चोदना जारी रखा मैं समझ गई कि अपने जमाने में उन्होने बहुत ही चूत मारी होगी। मैं उनसे अपनी चूत मरवाकर अपने आपको बड़ा अच्छा महसूस कर रही थी, उनसे चूत मरवाने में मैं बहुत खुश थी। उन्होंने बड़ी तेजी से मुझे झटके दिए, उन्होंने मुझे इतनी तेज झटके मारे मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लेकिन उसके बावजूद भी मुझे बड़ा मजा आ रहा था। उन्होंने मेरे साथ 5 मिनट तक अच्छे से संभोग किया लेकिन जैसे ही मैं झड़ने वाली थी तो मैंने उन्हें कसकर अपने दोनों पैरों के बीच में जकड़ लिया, उन्होंने मुझे बड़ी तेजी से धक्के मारे, उन्होंने मुझे इतनी तेज धक्के मारे की जब उनका वीर्य पतन हुआ तो मेरी योनि पूरी गर्म हो गई। जब उन्होंने अपने लंड को मेरी योनि से बाहर निकाला तो मेरी योनि खून से लहूलुहान हो चुकी थी, मेरी योनि से बहुत खून बह रहा था। उन्होंने मुझे कपड़ा दिया उसके बाद जब मैंने अपनी योनि को साफ किया तो वह मुझे कहने लगे प्रीति तुम्हारे साथ आज सेक्स करके मुझे मजा आ गया। काफी समय बाद मैंने किसी युवती को चोदा है और इतनी देर से मैं तुम्हारे साथ सेक्स करता रहा था उसके लिए तुम्हारा धन्यवाद कहना चाहता हूं, तुमने मेरी इच्छा पूरी कर दी। मैंने उन्हें कहा मैं अब हमेशा ही आपके पास आऊंगी और आपकी इच्छा पूरी कर दूंगी यह बात सिर्फ मेरे और सुधांशु जी को ही पता है।

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बुढ़ापे में भी पूरी जवानी थी | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/budhape-me-bhi-puri-jawani-thi/ Tue, 13 Nov 2018 16:08:55 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2607 Antarvasna, kamukta

मेरा नाम शोभित है मैं मुंबई का रहने वाला एक इंडिपेंडेंट खयालो का लड़का हूं। मैं मुंबई के एक अच्छे कॉलेज से पास आउट हूं और मैं अपने लिए कोई अच्छी नौकरी देख रहा था लेकिन उस वक्त मुझे मेरे मामा मिले और वह मुझे कहने लगे कि तुम कहां नौकरी के चक्कर में पड़े हो तुम अपना ही कोई कारोबार खोल लो, मैंने अपने मामा से कहा कि मेरे पास अपना काम खोलने के लिए इतने पैसे नहीं है। वह मुझे कहने लगे तुम मुझसे एक हफ्ते बाद मिलना मैं तुम्हें मिलकर समझाता हूं। मेरे मामा भी एक अच्छे पद पर हैं,  वह बहुत ही एक्टिव हैं और हर काम हो बड़ी लगन से करते हैं, उनकी हमारे पूरे परिवार में सब लोग बड़ी तारीफ करते हैं। मैं जब अपने मामा से मिलने गया तो मैं और मेरे मामा काफी देर तक एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे।

मेरे मामा मुझे कहने लगे मैं कुछ दिनों बाद एक नई प्रॉपर्टी खरीदने वाला हूं यदि तुम उसमें कोई काम शुरू करना चाहते हो तो तुम उसमें काम कर लो क्योंकि मेरी अभी काफी सर्विस बची हुई है इसलिए मैं सिर्फ तुम्हें वहां पर प्रोपर्टी खरीद कर दे सकता हूं और कुछ पैसे मैं तुम्हें इन्वेस्टमेंट के तौर पर दे दूंगा जिससे कि तुम वहां पर काम शुरू कर सको और मैं भी निश्चिंत हो जाऊंगा कि मैंने किसी अपने ही परिवार वालों को काम पर रखा है। हम दोनों के बीच में एक सहमति बन गई और मेरे मामा मुझे कुछ दिनों बाद वह प्रॉपर्टी दिखाने के लिए भी ले गए, जब हम लोग उस प्रॉपर्टी को देखने गए तो मुझे वह काफी अच्छी लगी और मैंने मामा से कहा कि क्या आपने इन्हें पैसे दे दिए हैं, मामा कहने लगे हां मैं उन्हें थोड़े पैसे दे चुका हूं और थोड़े पैसे मैं कुछ दिनों बाद उन्हें दे दूंगा। मेरे मामा ने जब वह प्रॉपर्टी खरीदी तो उन्होंने उसके बाद मुझे कुछ पैसे दे दिए जिससे कि हम लोग वहां पर सामान रखवा सके। मेरे मामा ने मुझे कहा कि यहां पर लेडीज आइटमओं का काफी अच्छा क्रेज है इसलिए तुम यहां पर यह सामान खरीद कर ले आओ ताकि हम लोग उसे अच्छे दामों पर बेचकर थोड़ा बहुत मुनाफा कमा सकें, मेरे मामाजी के ही परिचित में कुछ लोगों का होलसेल का काम था।

एक दिन मेरे मामा ने अपने ऑफिस से छुट्टी ली हुई थी और वह मुझे अपने साथ उनसे मिलाने के लिए ले गए, जब मैं उनसे मिला तो हम लोगों ने वहां से थोड़ा बहुत सामान ले लिया और दुकान पर रखवा लिया। कुछ दिनों तक तो दुकान पर काम चला लेकिन जब दुकान शुरू हो गई तो पहले दिन से ही अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा, दुकान में काफी कस्टमर आने लगे, मेरा भी रोजगार चल पड़ा था और मैं भी थोड़े बहुत पैसे कमाने लगा था इसलिए मैं अपने मामा का बहुत ही शुक्रगुजार था कि उन्होंने मुझे एक रोजगार दिया, मैं भी पूरी मेहनत से काम करने लगा। मैं आपने घर पर थोड़ा कम ही समय देता था और मेरे जितने भी दोस्त मुझसे मिलना चाहते थे वह मुझसे मिलने के लिए दुकान पर आ जाते थे या फिर जब मेरे पास समय होता तो मैं उनसे मिलने के लिए जाता था। एक दिन मेरा एक पुराना दोस्त मुझसे मिलने आया, वह मेरे साथ काफी देर तक बैठा हुआ था उसने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूं, मैंने उससे पूछा कि हां तो तुम बताओ तुम्हें क्या बताना है लेकिन वह मुझसे बात करने में थोड़ा हिचकिचा रहा था। मैंने उससे पूछा कि तुम मुझसे बात करने में इतना क्यों हिचकिचा रहे हो, वह कहने लगा मैंने तुम्हारी बहन को एक लड़के के साथ देखा था और वह लड़का मुझे कुछ ठीक नहीं लगा, मैंने उससे कहा कि क्या तुम यह बात सही कह रहे हो यदि यह बात गलत हुई तो मैं तुमसे कभी भी बात नहीं करूंगा, वह मुझसे कहने लगा तुम्हारी बहन भी तो मेरी बहन की तरह है क्या मैं तुमसे गलत बात कहूंगा। मुझे उसकी बातों पर थोड़ा बहुत तो यकीन था लेकिन मैं फिर भी उसकी बातों को झुटला रहा था क्योंकि मेरी बहन मुझसे हर बात शेयर करती है लेकिन यह बात उसने मुझसे छुपाई इसका मुझे थोड़ा बुरा लग रहा था। मुझे लग रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है, मैं जब शाम को घर लौटा तो अक्षरा उस दिन घर पर ही थी। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है, वह मुझे कहने लगी पढ़ाई तो अच्छी चल रही है। मैंने उसे कहा कि मैं तो खुले विचार का हूं लेकिन फिर भी तुमने मुझसे यह बात छुपाई,  मुझसे कहने लगी कौन सी बात।

मैंने उसे सारी बात बताई तो वह मुझसे कहने लगी कि मैं आपको बताना चाहती थी लेकिन शायद आप और मम्मी पापा मेरी बात को एक्सेप्ट नहीं करेंगे, मैंने उसे कहा कि ऐसी कौन सी बात है जो तुम हमसे छुपाना चाहती हो। उसने मुझे बताया कि वह जिस लड़के से प्रेम करती है, वह पहले से ही शादीशुदा है लेकिन उसका डिवोर्स होने वाला है। यह सुनकर मुझे थोड़ा अटपटा लगा और मैंने उसे कहा कि मैंने कभी भी तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं की थी लेकिन तुम मेरी बहन हो इसलिए मैं तुम्हें कुछ नहीं कह रहा, तुम मुझे उस लड़के से मिलवा दो तो ज्यादा अच्छा रहेगा। उसने कुछ दिनों बाद मुझे उससे मिलवाया, वह मुझे अपने घर पर ले गया। मैं जब उसके घर पर गया तो उसके घर पर सिर्फ उसकी मम्मी थी, उसकी पत्नी उसके साथ नहीं रहती थी, उसने मुझे जो कारण बताया वह सुनकर मुझे थोड़ा सा ताजूब हुआ क्योंकि उसकी पत्नी और उसके बीच में बिल्कुल अच्छे संबंध नहीं थे और वह दोनों अलग रहने लगे थे। मैं काफी समय तक उसके घर पर बैठा तो मुझे लगा कि लड़का तो अच्छा है उसमें कोई भी बुराई नहीं है लेकिन वह पहले से शादीशुदा है,  इस बात से मैं थोड़ा चिंतित था।

उस लड़के का नाम रोहन है, रोहन की मम्मी एक दिन मेरे पास आई, वह मुझे कहने लगी तुम मुझे कुछ अच्छी चीज दिखाओ। मैं उन्हें देखकर थोड़ा सा हैरान था क्योंकि वह काफी उम्र की है लेकिन वह भी अपने आप को बहुत मेंटेन रखती हैं। उन्होंने मुझसे पिंक कलर की पैटी ब्रा मांगी, मै जब उन्हें  पैंटी ब्रा दिखा रहा था तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया, उनकी नजरे मुझे ही देख रही थी। मैंने उनसे कहा लगता है आपको कुछ चीज चाहिए वह कहने लगी हां तुम मेरे इशारे समझ गए। मैं उनका हाथ पकड़ते हुए दुकान के अंदर ले गया, मैंने बड़ी गर्मजोशी से जब उनके होठों को छूआ तो वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई और मेरे लंड को उन्होंने अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया। वह काफी देर तक मेरे लंड को हिलाती रही, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे लंड से मेरा वीर्य ना निकल जाए। जब उन्होंने अपने मुंह के अंदर में मेरे लंड को लिया तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरे लंड को वह लॉलीपॉप की तरह चूस रहे हैं। उन्होंने काफी देर तक मेरे लंड को सकिंग किया। जब मेरा लंड उन्हें चोदने के लिए तैयार हो गया तो उन्होंने मुझसे कहा तुम मुझे घोडी बना दो। मैंने उन्हें घोडी बनाया और जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी योनि मे लगाया तो उन्होंने मेरे लंड को पकड़ते हुए अपनी गांड के छेद पर लगा दिया। मैंने बहुत तेज झटका मारा जिससे कि मेरा लंड उनकी गांड के अंदर घुस गया और  वह चिल्लाने लगी, मेरा लंड उनकी गांड के अंदर जा चुका था। मैंने उन्हें कहा आपकी गांड तो बड़ी सेक्सी है मुझे आपकी गांड मारने में बड़ा मजा आ रहा है। उन्होंने अपनी गांड को मुझसे मिलाना शुरू कर दिया। मुझे मजा आ रहा था और वह भी पूरे मजे ले रही थी। हम दोनों ने 5 मिनट तक एक दूसरे के लंड और गांड का आनंद लिया, जब मेरा वीर्य उनकी गांड के अंदर गिरा तो वह कहने लगी तुम्हारा वीर्य तो बड़ा ही गरमा गरम है, मुझे अपनी गांड में तुम्हारे वीर्य को लेकर बड़ा मजा आया। काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे। उसके बाद से वह जब भी मेरी दुकान में आ जाया करती तो मेरी दुकान से वह काफी सामान भी ले जाती थी। जब वह मेरी दुकान में आती तो वह अपनी गांड दबा देती और मुझे कहती तुम मेरी खुजली मिटा दो, मैं भी उनकी गांड की खुजली मिटा देता। मेरी बहन रोहन के साथ खुश है इसलिए मुझे भी कोई आपत्ति नहीं है। मेरी बहन भी मेरे निर्णय से खुश है, मैं उसका पूरा साथ दे रहा हूं ताकि उन दोनों की शादी हो पाए।

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लालची भाभी की गांड मार कर उन्हें सबक सिखाया | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/lalchi-bhabhi-ki-gand-mar-kar-sabak-sikhaya/ Mon, 12 Nov 2018 16:03:25 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2602 antarvasna, kamukta kahani

मेरा नाम सुरेंद्र है मैं मुंबई में रहता हूं, मेरी उम्र 34 वर्ष है। मुझे मुंबई में आए हुए 10 वर्ष हो चुके हैं, मेरे मुंबई में आने के पीछे भी एक बहुत बड़ी घटना है, जिसने मुझे मुंबई आने पर विवश कर दिया। मैं अपने गांव में बहुत खुश था और मेरे माता-पिता भी उस वक्त बहुत खुश थे लेकिन जब मेरे माता-पिता का देहांत हुआ तो मेरे भैया भाभी ने मुझसे सब कुछ हथिया लिया,  उन्होंने सब कुछ अपने कब्जे में कर लिया, मुझे वह लोग खाना भी नहीं देते थे। वह लोग सिर्फ यही चाहते थे कि मैं किसी तरीके से बस घर से कहीं दूर चला जाऊं, मुझे बहुत ज्यादा दुख हुआ जब मेरे सगे भाई ने मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया, मुझे अपने भाई पर बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि मेरी भाभी तो पहले से ही लालची थी लेकिन मुझे अपने भाई से बिल्कुल भी ऐसी उम्मीद नहीं थी।

वह मुझे हमेशा ही कहता था कि मैं तुम्हारा बहुत ध्यान रखूंगा लेकिन जब उसने मेरे साथ इस प्रकार का व्यवहार किया तो मैं उसके स्वभाव से बहुत आहत हुआ और मैंने तय कर लिया कि मैं अब कहीं और चला जाऊंगा, उसके बाद मैंने मुंबई जाने का फैसला कर लिया। मैं जब मुंबई पहुंचा तो मैं ज्यादा किसी को भी नहीं पहचानता था लेकिन उस वक्त मेरी मुलाकात एक महिला से हो गयी वह बहुत ही अच्छी महिला हैं उनकी भी कोई संतान नहीं थी इसलिए मैंने उनकी बहुत देखभाल की और उसके बदले उन्होंने मुझे अपनी मुंबई की सारी प्रॉपर्टी दे दी, वह भी मेरे साथ रहती हैं और मैं उनकी बहुत देखभाल करता हूं क्योंकि उन्होंने ही मुझे सहारा दिया और मुझे इस काबिल बनाया कि मैं कुछ काम करूं। मैं जब भी उनके साथ बैठकर अपनी पुरानी जिंदगी की बात करता हूं तो वह मुझे हमेशा कहते हैं कि अब तुम अपने पुराने समय को भूल जाओ और अब आगे बढ़ने की कोशिश करो, तुम अब बहुत आगे निकल चुके हो यदि तुम  पलट कर देखोगे तो यह तुम्हारे लिए ही हानिकारक होगा और हो सकता है कि तुम बहुत ही नुकसान में रहो। हमेशा ही मेरे दिल में यह बात आती कि मुझे एक बार अपने गांव जरूर जाना चाहिए और गांव जाकर अपने भाई और भाभी को सबक सिखाना है, अब मैं इतना सक्षम तो हो चुका था।

मैं कई बार सोचता कि मैं अपने गांव जाऊँ लेकिन मैं अपने काम के चलते अपने गांव नहीं जा पा रहा था। मैंने अभी तक शादी नहीं की क्योंकि मेरे दिल में यह बात बैठ चुकी है कि यदि मैं शादी करूंगा तो शायद मेरी आने वाली पीढ़ी भी इसी प्रकार से एक दूसरे के साथ धोखा करेगी इसलिए मैंने शादी के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचा और मैं चाहता भी नहीं की मैं शादी करूं। मैंने अपना काम भी अच्छा खासा जमा लिया है और मुझे पैसे की भी कोई दिक्कत नहीं है इसीलिए मैंने एक दिन निर्णय कर लिया कि मैं अब अपने गांव जाऊंगा और अपने भैया की स्थिति देखूंगा। उन्होंने मेरे साथ इतना कुछ अन्याय किया, मैं भी एक बार उनसे मिलकर इस बारे में जरूर पूछना चाहता था इसीलिए मैं अपने गांव जाने के लिए तैयार हो गया। जब मैं अपने गांव पहुंचा तो मैंने वहां का माहौल देखा, वहां पर बहुत कुछ चीजें पहले जैसे नहीं थी क्योंकि इतने सालों बाद सब कुछ वहां बदल चुका था। मेरी भी शक्ल सूरत पहले जैसी नहीं थी, मैंने भी अब अपनी दाढ़ी बहुत ज्यादा बड़ी कर ली जैसे कि यदि मुझे किसी ने पहले देखा होगा तो शायद वह भी मुझे पहचान नहीं पाएगा। मैं अपनी पुरानी चाय की दुकान पर बैठा तो वह पहले के जैसे ही थी, वह बिल्कुल भी बदली नहीं थी और उस में काम करने वाले व्यक्ति की भी शक्ल में बिल्कुल भी बदलाव नहीं था। मैंने जब उसे कहा कि काका मेरे लिए एक चाय बना देना तो उसने मेरे लिए गरमा गरम चाय बनाई, मैंने वह चाय पी और चाय पीते पीते मैंने उससे पूछा कि गांव में एक राजेंद्र नाम के व्यक्ति हैं क्या आप उन्हें पहचानते हैं, वह कहने लगे हां मैं उन्हें पहचानता हूं लेकिन काफी समय से वह बहुत बीमार चल रहे हैं, मैं उन्हें काफी समय से मिला नहीं हूं, पहले तो वह हमेशा दुकान पर चाय पीने आ जाते थे लेकिन काफी समय हो गया जब से वह दुकान पर नहीं आए हैं। मैंने उनसे पूछा कि क्या उनके बच्चे भी हैं,  वह कहने लगे उनके दो छोटे बच्चे हैं। मैं पूरी तरीके से आश्वस्त हो चुका था कि वह मेरे भैया ही हैं, मैंने उस चाय वाले को पैसे दिए तो वह मुझसे पूछने लगा कि तुम कौन हो, मैंने उसे अपना परिचय नहीं दिया और कहा कि बस ऐसे ही वह मेरे परिचित है,  मैंने सोचा आप उन्हें पहचानते होंगे तो आपसे मैंने पूछ लिया।

मैं अब वहां से चला गया, जब मैं अपने भैया और भाभी के घर पर गया तो मैंने अपने भैया की स्थिति देखी तो उनकी स्थिति को देख कर मुझे ऐसा लगा कि उन्होंने जैसा मेरा साथ किया शायद उन्हें उसी का फल मिल रहा है। मेरी भाभी भी बड़ी दुबली पतली हो चुकी थी, उन्होंने मुझे पहचाना नहीं। मैंने जब अपना परिचय दिया तो वह लोग मुझे देखकर हक्के बक्के रह गए और कहने लगे तुम इतने सालों बाद कैसे वापस आ गए। मेरे भाई और भाभी मुझसे क्षमा मांगने लगे और कहने लगे हम दोनों ने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया, शायद उसी का फल हमें मिल रहा है। मैंने अपने भैया से कहा कि यदि आपने मेरे बारे में सोचा होता तो शायद आप लोग कभी ऐसा नहीं करते, मैंने उन्हें कहा लेकिन वह पुरानी बात हो चुकी है अब उसे भूलने में ही फायदा है। उन लोगों का रवैया मेरे लिए थोड़ा बहुत तो बदल चुका था,  उन्होंने मुझे घर पर ही रुकने के लिए कहा। मैं अपने भाभी से रात को बात कर रहा था, उन्होने मुझे कहा मैने बहुत ही गलत किया, मैंने तुम दोनों भाइयों के बीच में दरार पैदा कर दी और तुम्हें भी कहीं का नहीं छोड़ा।

मैंने कहा मैं तो अब संपन्न हो चुका हूं मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं है लेकिन मुझे अपनी भाभी से बहुत ज्यादा नफरत थी। मैंने उन्हें कुछ पैसे देते हुए कहा मैं आपकी गांड मारना चाहता हूं। वह पैसे देखकर एकदम से ललचा मे आ गई क्योंकि उनके अंदर का लालच वैसे का वैसा ही था वह बिल्कुल भी नहीं बदली थी। वह मुझसे अपनी गांड मरवाने के लिए तैयार हो गई और कहने लगे तुम मेरी गांड मार लेना। मैंने भी उन्हें कमरे में पूरा नंगा कर दिया वह पहले जैसे तो नही थी लेकिन फिर भी उनमें थोड़ी बहुत जवानी बची हुई थी। मैंने उनसे काफी देर तक अपने लंड को चुसवाया, मैंने उन्हें अपने वीर्य को मुंह के अंदर लेने के लिए कहां  उन्होंने मेरे वीर्य को अपने मुंह के अंदर ले लिया और बड़े अच्छे से उन्होंने मेरे लंड को चाटा। मैंने जब उन्हें कहा कि आप मेरे लंड पर सरसों का तेल लगा लीजिए ताकि आपकी गांड मारने में मुझे आसानी हो। उन्होंने मेरे लंड पर तेल लगा लिया वह मुझे कहने लगी अब आप मेरी गांड मार लीजिए। मैंने भी उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं अपने पुराने दिन याद करने लगा और उनकी गांड से मैंने खून निकाल दिया। मैंने बड़ी ही तेज गति से उनकी गांड मारना जारी रखा, मैंने उनकी गांड के घोड़े खोल कर रख दिए मैने बड़ी तेज गति से उन्हें धक्के मारे। वह मुझे कहने लगी आपने तो मेरी गांड ही फाड़ कर रख दी। मैंने अपनी भाभी से कहा आपने भी कम अन्याय नहीं किया है मेरे साथ मैने भाभी से कहा अपनी गांड को मेरे लंड से टकराते रहिए। उन्होंने मेरे लंड से अपनी गांड को टकराना प्रारंभ किया, मैंने बड़ी तेजी से झटक मारे, जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और दोबारा से हिलाना शुरू किया मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। मैंने दोबारा से उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया और जैसे ही मेरा लंड उनकी गांड के अंदर घुसा तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी आपने तो मेरी गांड फाड़ दी। मैंने उन्हें बड़ी तेजी से झटके मारे, मैंने उन्हें 5 मिनट तक अच्छे से झटके मारे जिससे कि उनकी गांड के पूरे घोड़े खुल चुके थे। वह मुझे कहने लगी आज मेरी इच्छा पूरी कर दी और जब मेरा वीर्य पतन होने वाला था तो मैने उनकी चूतडो के ऊपर अपने वीर्य को गिरा दिया। वह बहुत ही खुश नजर आ रही थी उनके अंदर का लालच अब भी वैसा ही था।

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रसगुल्ले वाली आंटी का डीलडौल वाला शरीर | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/rasgulle-wali-aunty-ka-dealdaul-wala-sharir/ Sun, 11 Nov 2018 12:38:15 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2598 desi aunty sex stories, antarvasna

मेरा नाम आशीष है मैं नासिक का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं बहुत ही क्रिएटिव सोच का हूं और मुझे अपने जीवन में कुछ नया करना अच्छा लगता है इसी वजह से मैं हमेशा कुछ नया करने की सोचता रहता हूं। मेरे पापा और मम्मी मेरा बहुत ही ज्यादा सपोर्ट करते हैं, वह हमेशा कहते हैं कि तुम बहुत ही टैलेंटेड हो तुम यदि इसी प्रकार से मेहनत करते रहोगे तो तुम जरूर एक दिन एक अच्छा मुकाम हासिल कर लोगे। हालांकि मेरी उम्र 30 वर्ष हो चुकी है लेकिन उसके बावजूद भी मेरे माता पिता मेरा बहुत ही ज्यादा सपोर्ट करते हैं। हमारे जितने भी रिश्तेदार हमारे घर पर आते हैं वह सब कहते हैं कि आशीष की तो उम्र हो चुकी है, आप लोग अभी भी उसका सपोर्ट कर रहे हैं। मैं एक मस्त इंसान हूं, मेरा जब भी जो मन करता है मैं वही करता हूं और यदि मेरी इच्छा कहीं घूमने की होती है तो मैं घूमने के लिए चला जाता हूं। मुझे कोई भी क्रिएटिव काम करना अच्छा लगता है चाहे वह मुझसे हो पाए या ना हो पाए लेकिन फिर भी मैं उसमें अपनी रुचि दिखाता हूं।

यह बात दो महीने पहले की है जब मैं अपने दोस्त प्रदीप के घर दिल्ली गया था। मैं दिल्ली किसी एग्जिबिशन में गया हुआ था वहां पर मैं काफी दिनों के लिए रुक गया, मेरा दोस्त भी मुझे वहां पर मिला, उसका नाम प्रशांत है। प्रशांत की फैमिली पहले नासिक में ही रहती थी लेकिन वह अब दिल्ली में रहते हैं, वह लोग दिल्ली में ही सेटल हो चुके हैं। प्रशांत मुझसे जिद करने लगा और कहने लगा आज तुम मेरे साथ मेरे घर पर चलोगे, मैंने उसे कहा आज तो संभव नहीं हो पाएगा। वह मुझसे ज्यादा ही जिद करने लगा,  वह तब तक एग्जिबिशन से घर नहीं गया जब तक कि मैं वहां से फ्री नहीं हुआ,  वह वहीं मेरा इंतजार कर रहा था, वह मुझे अपने घर पर लेकर ही गया। जब मैं प्रशांत के घर पर गया तो प्रशांत के माता-पिता मुझे पहले से ही पहचानते थे इसीलिए जब मैं उन लोगों से मिला तो मुझे प्रशांत के माता-पिता से मिलने में कोई भी दिक्कत नहीं हुई क्योंकि हम लोग पहले से ही दूसरे को अच्छे से पहचानते हैं।

प्रशांत की मम्मी मुझे कहने लगी आशीष बेटा आजकल तुम क्या कर रहे हो, मैंने उन्हें कहा कि आंटी आजकल तो मैं घर पर ही हूं और कुछ दिनों के लिए एग्जिबिशन में आया हुआ था। वह कहने लगी यह तो तुमने बहुत अच्छा किया कि तुम हमसे मिलने हमारे घर पर आ गए, मुझे भी नासिक की बहुत याद आती है और मैं तुम्हारी मम्मी को भी बहुत मिस करती हूं, वह लोग कैसे हैं। जब आंटी ने मुझसे पूछा तो मैंने उन्हें कहा कि मम्मी और पापा दोनों ही अच्छे हैं और वह लोग अपनी जिंदगी में ही बिजी हैं। प्रशांत की मम्मी का हमारे घर पर आना जाना लगा रहता था और वह हमसे बहुत ही अच्छे से परिचित थे, उसके पापा भी मेरे साथ काफी देर तक बैठे रहे।  अंकल मुझे कहने लगे हम लोग तो प्रशांत की शादी के बारे में सोच रहे हैं।  उस वक्त प्रशांत ने मुझसे कहा कि पापा तो कुछ भी कहते रहते हैं अभी कौन सा मेरी उम्र शादी की हो चुकी है लेकिन प्रशांत के पिताजी बहुत ही सीरियस दिखाई दे रहे थे, वह प्रशांत के पीछे ही पड़ गये। वह मुझे कहने लगे बेटा तुम ही प्रशांत को समझाओ वह अब शादी के लिए तैयार हो जाए क्योंकि प्रशांत के सिवा हमारा और कोई भी नहीं है, हम लोग चाहते हैं कि प्रशांत जल्दी से शादी कर ले ताकि हम लोग भी जल्दी फ्री हो जाएं। जब अंकल ने मुझसे यह बात कही तो मैंने भी प्रशांत को मजाकिया अंदाज में कहा कि तुम्हें भी शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि तुम्हारी उम्र हो चुकी है और मैंने उसे आंख भी मार दी, वह समझ गया कि मैं उसे बस उसके माता पिता के सामने ही कह रहा हूं, प्रशांत भी मुझे कहने लगा अब तो आशीष की भी उम्र हो चुकी है तो क्या आशीष को भी शादी कर लेनी चाहिए। प्रशांत के पिताजी ने कहा कि यह तुम आशीष से ही पूछ लो कि वह कब शादी करना चाहता है क्योंकि हो सकता है आशीष ने कहीं अपने लिए कोई लड़की पसंद कर रखी हो। मैंने अंकल से कहा, नहीं अंकल ऐसी कोई भी बात नहीं है मैं शादी के बारे में ज्यादा नहीं सोचता क्योंकि पापा ने दीदी की शादी तो पहले ही करवा दी थी और दीदी के बच्चे भी हमारे घर पर आते हैं तो वह उनके साथ खेल लेते हैं इसीलिए मैं ज्यादा शादी के बारे में विचार नही करता।

हम लोग काफी देर तक बैठे रहे, जब परेशान मुझे अपने रूम में ले गया तो हम दोनों ही अपने नासिक की पुरानी बातें याद कर रहे थे। प्रशांत मुझसे कहने लगा यार नासिक में तो बहुत ही मजा आता था, मैं अब भी अपने पुराने दिन याद करता हूं तो मुझे हंसी आ जाती है, क्या तुम अभी भी पहले जैसी शरारती करते हो या फिर अब थोड़ा सुधर चुके हो। मैंने प्रशांत से कहा की अब उम्र हो चुकी है, अब बचपना तो रह नहीं गया है कि पहले जैसी शरारती करें इसलिए अब मैं सिर्फ अपने काम पर ध्यान देता हूं, मुझे जो भी कुछ नई चीज दिखाई देती है तो मैं वही करना शुरू कर देता हूं और अपने ही अंदाज में वह काम करता हूं। प्रशांत और मैं जब अपनी पुरानी बातें याद कर रहे थे तो मुझे भी प्रशांत के साथ बात करना अच्छा लग रहा था, उसने भी कुछ पुरानी तस्वीरें मुझे दिखाई जिसमें कि हमारे ही कॉलोनी के सारे लड़के थे, वह सब अब बड़े हो चुके हैं। हम दोनों आपस में बात कर रहे थे तो प्रशांत ने मुझसे कहा आजकल मैंने आंटी फंसा रखी है उस से ही अपना काम चला रहा हूं।

जब मैंने प्रशांत के मुंह से यह बात सुनी तो मेरे अंदर भी उत्सुकता जागने लगी। मैंने उसे कहा मुझे भी तुम उस आंटी से मिलवा दो। प्रशांत के साथ रहते हुए मेरे अंदर हरामीपन जाग उठा। प्रशांत कहने लगा ठीक है कल हम लोग उस आंटी के पास चलते हैं, सुबह तुम कंडोम भी ले लेना। मैंने उसे कहा ठीक है हम लोग कल उस आंटी से मिलाते हैं। अगले दिन हम लोग तड़के ही उस आंटी के घर पहुंच गए, जब मैंने उस आंटी को देखा तो उनकी गांड और उनके स्तनों के ऊभार मुझे दिखाई दिए मुझे तो उन्हें गले लगाने की इच्छा हुई मैंने कुछ देर बाद उन्हें गले लगा ही लिया। आंटी मुझसे मिलकर बड़ी खुशी हुई वह मुझे अपने साथ अपने बेडरूम में ले गई। प्रशांत मेरी तरफ देख रहा था और मैं अंदर बेडरूम में चला गया आंटी ने मुझे अपने ऊपर लेटा लिया उनका बदन भारी भरकम था। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और जब मैने उनके स्तनों को अपने हाथों से दबाया तो वह पूरे मूड में आ जाती और मुझे भी बड़ा आनंद महसूस होने लगा। जब मैंने आंटी के सारे कपड़े खोल दिए तो उनकी योनि में हल्के भूरे रंग के बाल थे मैंने उनकी चूत के अंदर अपनी दो उंगलियों को एक साथ घुसेड दिया और अंदर बाहर किया जिससे कि वह मेरे लंड को अपनी योनि में लेने के लिए तैयार हो गई। मैंने जैसे ही अपने कड़क लंड को उनकी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो उनके चेहरे से एक खुशी के भाव झलक रहे थे। मैंने उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के देना शुरू कर दिए मैं उन्हें इतनी तेज गति से धक्के मार रहा था वह मुझे कहने लगी तुम्हारे साथ सेक्स कर के मुझे आनंद आ रहा है और तुम्हारा लंड बड़ा मोटा और कठोर है। मैंने उनके साथ 10 मिनट तक संभोग किया जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो उन्होंने मुझे कहा कि तुम मेरी गांड की खुजली को भी मिटा दो। मैंने उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया, जैसे ही मेरा लंड उनकी गांड के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी वह बड़ी तेज आवाज में मुझे अपनी ओर आकर्षित करने लगी। मेरा लंड उनकी गांड के अंदर बड़ी तेज गति से जा रहा था। उनकी गांड का छेद इतना बड़ा नहीं था कि मैं ज्यादा देर तक उनकी गांड को झेल पाता, जैसे ही मेरा वीर्य आंटी की गांड के छेद के अंदर गिरा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। उसके बाद आंटी ने मुझे रसगुल्ले भी खिलाएं मैं जब बाहर आया तो प्रशांत ने भी आंटी के जिस्म का रसपान किया। मैं जितने दिन दिल्ली में रुका उतने दिन तक मैं और प्रशांत दोनों ही आंटी से मिलने के लिए चले जाते थे।

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अनजान लड़की ट्रेन में मिली | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/anjan-ladki-train-me-mili/ Sat, 10 Nov 2018 12:39:07 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2596 kamukta, antarvasna

मेरा नाम राजीव है मैं बनारस का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 24 वर्ष है। मैं पुणे से एमबीए की पढ़ाई कर रहा हूं, यह मेरा आखिरी वर्ष है, मुझे पुणे में 10 वर्ष के करीब हो गया है और मैं अपनी पढ़ाई में बहुत ही ज्यादा ध्यान देता हूं। मैं पढ़ने में भी पहले से ही अच्छा था इसीलिए मेरे पिताजी ने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए पुणे भेज दिया, वह चाहते थे कि मैं एक अच्छे कॉलेज में पढूं इसीलिए मैं पुणे के एक अच्छे कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूं और जिस प्रकार से उन्होंने  मुझे एक अच्छे कॉलेज में पढ़ने के लिए भेजा मैं हमेशा ही उनके लिए सोचता हूं क्योंकि वह ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं। मेरे पिताजी स्कूल में एक कलर हैं, मैं हमेशा ही उन्हें ध्यान में रखकर अपनी पढ़ाई करता हूं और सोचता हूं कि किस प्रकार से उन्होंने मुझे इतनी दूर पढ़ने के लिए भेजा।

मैं कॉलेज के हॉस्टल में रहता हूं, मेरी एक बार कॉलेज में किसी बात को लेकर कुछ लड़कों के साथ बहस हो गई थी, वह बात बहुत ज्यादा बढ़ गई जिसकी वजह से कॉलेज प्रशासन ने मेरे घर वालों को कॉलेज में बुला लिया, मैं नहीं चाहता था कि उनके सामने मेरी बेइज्जती हो लेकिन जब यह बात मेरे पापा को पता चली तो उन्होंने मुझे कहा कि तुम यदि अपनी पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पा रहे हो तो तुम आपस आ जाओ। वह अच्छे व्यक्ति होने के साथ साथ बहुत सख्त किस्म के भी हैं। मैंने उन्हें कहा कि ऐसी कोई भी बात नहीं हुई है, उन लड़कों ने हीं मेरे साथ बदतमीजी की थी इसीलिए मैंने भी उन्हें उसका जवाब दे दिया जिस वजह से कॉलेज प्रशासन को पता चल गया और उन्होंने आपको नोटिस भिजवा दिया। मैंने उस दिन अपने पापा को तो मना लिया लेकिन कॉलेज में वह लोग मेरी बात मानने को तैयार नहीं थे, मैंने उन्हें बहुत समझाया लेकिन वह लोग बिलकुल भी मेरी बात सुनने को तैयार नहीं थे। वह मुझे कहने लगे कि तुम्हें अपने पापा को तो कॉलेज में बुलाना ही पड़ेगा क्योंकि हमारे कॉलेज के रूल बडे ही शक्त थे इसीलिए मुझे अपने पापा को कॉलेज में बुलाना पड़ा।

जब वह आए तो उन्होंने कॉलेज में मेरे टीचर बात की, उन्होंने उस दिन तो वार्निंग देकर छोड़ दिया परंतु मेरे पापा अपने स्कूल से छुट्टी लेकर आए थे और मुझे बहुत बुरा लग रहा था कि वह मेरे लिए इतनी दूर आए। मैंने पापा को कहा कि मेरी वजह से आपको इतनी तकलीफ हुई, वह कहने लगे कोई बात नहीं यदि तुम गलत नहीं हो तो मैं तुम्हारा साथ हमेशा दूंगा। मैंने उनके लिए रुकने के लिए एक गेस्ट हाउस में बात की थी और वह वहीं रूके, जब वह वहां रुके थे तो उस दिन मैंने पापा के साथ ही बाहर डिनर किया। जब मेरे पापा मेरे साथ बैठे हुए थे तो वह मुझसे पूछने लगे  तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है, मैंने उन्हें कहा पढ़ाई तो अच्छी चल रही है  परन्तु आपको मेरी वजह से बहुत ही दुख हुआ होगा,  वह कहने लगे कोई बात नहीं तुम यदि पहले ही यह बात बता देते तो मैं खुद ही आ जाता लेकिन अब मेरे पिताजी पूरी तरह से संतुष्ट हो चुके थे इसलिए वह कहने लगे कोई बात नहीं तुम अपनी पढ़ाई में ध्यान दो कभी कबार ऐसा हो जाता है। मैंने अपने पिताजी को गेस्ट हाउस में छोड़ा, उसके बाद मैं वहां से अपने हॉस्टल आ गया, जब मैं अपने हॉस्टल में पहुंचा तो मैंने अपने पापा को फोन कर दिया, वह मुझे कहने लगे मेरी कल सुबह की ट्रेन है मैं सुबह सुबह ही निकल जाऊंगा। वह कहने लगे तुम अपना ध्यान रखना और अगली सुबह वह बनारस के लिए निकल पड़े, जब वह बनारस पहुंच गए तो उन्होंने मुझे फोन कर दिया और कहने लगे मैं घर पहुंच चुका हूं। उनके जाने से मुझे भी बहुत अजीब सा लग रहा था इसलिए मैं भी सोचने लगा मैं भी कुछ दिनों बाद घर चला जाता हूं, कुछ दिनों के बाद हमारे कॉलेज की छुट्टियां पढ़ने वाली थी तो मैंने अपना रिजर्वेशन पहले ही करवा लिया था। मैंने अपना रिजर्वेशन करवाया तो मैंने अपने पापा को बता दिया कि मैं कुछ दिनों के लिए घर आ रहा हूं क्योंकि कॉलेज की छुट्टियां पड़ रही है। यह बात सुनकर मेरे पापा मम्मी बहुत खुश हो गए और वह कहने लगे तुम्हारी कितने दिनों की छुट्टियां है, मैंने उन्हें कहा कि 20 दिन की हमारी छुट्टियां हैं और मैं यहां से कुछ दिनों में ही निकल जाऊंगा। मैं जब अपने घर के लिए निकला तो मैं ट्रेन में ही बैठा हुआ था, मेरे आसपास काफी लोग बैठे हुए थे, मेरे सामने ही एक परिवार था वह मुझसे पूछने लगा कि क्या कम पुणे के रहने वाले हो, मैंने उन्हें कहा नहीं मैं बनारस का रहने वाला हूं।

मैं अब अपनी सीट में लेट गया, ट्रेन भी अपनी रफ्तार से चल रही थी, मैं अपने लैपटॉप में ही मूवी देख रहा था और जब एक स्टेशन में ट्रेन रुकी तो मैं ट्रेन से नीचे उतर गया, मैंने बाहर से एक पानी की बोतल ली और कुछ देर तक मैं बाहर ही टहलका रहा। जब ट्रेन निकलने वाली थी तो मैं ट्रेन में चढ़ गया। मैं जब ट्रेन में चढ़ा तो मुझे सामने ही एक लड़की दिखाई दे गई वह जींस और टॉप पहने हुए बैठी हुई थी उसने वाइट कलर का टॉप पहना हुआ था उसमें वह बड़ी ही सेक्सी लग रही थी। मैं दरवाजे के सामने ही खड़ा हो गया और उसे देखने लगा। मैं काफी देर तक उस पर अपने नजरों से बाण चलाता रहा, जब उसकी नजर मुझ पर पड़ी तो वह भी बड़े ध्यान से मुझे देख रही थी कुछ देर मैंने उसे इशारा किया और अपने पास बुला लिया। वह दरवाजे के पास आ गई, हम दोनों वहां पर खड़े होकर बात करने लगे उसका नाम रूपल था। रूपल और मेरी काफी देर तक बात हुई जब वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो गई तो हम दोनों ही बाथरूम में घुस ग।ए मैंने जब रूपल के गुलाबी होठों को बहुत देर तक रसपान किया और उसके होठों से खून निकाल दिया तो मैं बहुत खुश हो गया।

जब मैंने उसके स्तनों को चूसा तो उसके छोटे से स्तन मैंने काफी देर तक चूसे, उसके निप्पल भी बड़े गोल थे और उन्हें चूसकर मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसकी योनि से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी। मैंने जब रूपल से कहा तुम अपनी जींस को उतार दो, जब उसने अपनी जींस के बटन को खोला तो उसने अंदर से ब्लैक कलर की पैंटी पहनी हुई थी, उसमें वह बड़ी सेक्सी दिख रही थी। उसने जैसे ही अपनी जींस को नीचे उतारा तो मैंने उसकी योनि के अंदर अपनी उंगली डाल दी उसकी योनि बड़ी ही टाइट थी और वह पूरी तरीके से मेरे साथ सेक्स करने को उतारू थी। जब मैंने उसे घोड़ी बनाया तो मैंने धीरे धीरे उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी तुम्हारा लंड तो बड़ा ही मोटा है। मैंने उसकी गांड को पकड़ कर रखा और बड़ी तेज गति से मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर करना जारी रखा। मैं जब भी अपने लंड को अंदर करता तो वह अपने मुंह से मादक आवाज निकालती और मुझे अपनी ओर आकर्षित करती। मैंने उसकी चूत बहुत देर तक मारी जब उसकी चूत ने कुछ ज्यादा ही तरल पदार्थ छोड़ना शुरू किया तो मुझे लग गया कि अब यह झडने वाली है। मुझे उसे चोदते हुए 5 मिनट हो चुके थे और उन 5 मिनट में मैंने उसे 250  झटके मार दिए थे लेकिन मेरे झटके इतनी तेज थे कि मेरे झटको से रूपल को दर्द होने लगा था। उसकी चूतड लाल हो चुकी थी, उसकी चूतड का साइज बड़ा गोल सा था उसकी टांगें भी बहुत लंबी थी। मैंने उसे बड़ी तेज गति से झटके मारे जैसे ही मेरा वीर्य उसकी टाइट योनि के अंदर गिरने वाला था तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई। मैंने उसे तेजी से झटके देने शुरू कर दिए मेरा वीर्य इतनी तेजी से गिरा कि उसे बिल्कुल भी पता नहीं चला। वह सोच रही थी मेरा वीर्य अभी भी नहीं गिरा है लेकिन मेरा वीर्य गिर चुका था। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो वह मुझे कहने लगी डार्लिंग तुम तो बड़े ही सेक्सी हो मुझे तुम्हारे साथ संभोग कर के बड़ा मजा आ गया। मैंने भी रूपल के साथ बहुत अच्छे से सेक्स किया लेकिन उसके बाद ना तो कभी वह मुझे मिली और ना ही मेरा उससे कोई संपर्क हो पाया। मैं अब भी उसकी खोज में हूं मै उसे हमेशा ही हर जगह तलाशने की कोशिश करता हूं लेकिन अभी तक वह मुझे नहीं मिली।

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घरवालों की पसंद की लड़की | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/gharwalon-ki-pasand-ki-ladki/ Fri, 09 Nov 2018 12:38:00 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2595 desi kahani, antarvasna

मेरा नाम आकाश है मैं बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में काम करता हूं, मेरी उम्र 32 वर्ष हो चुकी है और कुछ समय पहले ही मुझे मेरे माता पिता ने मुझे अर्चना से मिलवाया। वह लोग अर्चना को पहले से ही जानते थे, मैं भी उससे मिलकर खुश था। मैं अर्चना से शादी के सपने देखने लगा था क्योंकि वह दिखने में तो बहुत सुंदर है। जिस प्रकार से वह सोचती थी, उसके बात करने का अंदाज मुझे बहुत अच्छा लगता लेकिन मेरी अर्चना से ज्यादा बात नहीं हो पाती थी क्योंकि मैं भी अपने काम में व्यस्त रहता था और अर्चना भी कंपनी में जॉब करती इसीलिए हम दोनों कभी कबार ही मिल पाते। मुझे यह बात तो अच्छे से पता थी कि मेरे परिवार वाले मेरी शादी अर्चना के साथ ही करवाना चाहते हैं, मुझे अर्चना से कोई भी दिक्कत नहीं थी लेकिन मैं उसे अच्छे से समझ नहीं पा रहा था क्योंकि हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा वक्त नहीं बिता पाए थे।

एक दिन मैंने अर्चना से कहा कि यदि तुम्हारे पास वक्त हो तो हम लोग कहीं बाहर चलते हैं ताकि हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिता पाए, अर्चना ने मुझे कहा कि ठीक है कुछ दिनों बाद मैं ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी लेने वाली हूं, उस दौरान हम दोनों मुलाकात कर सकते हैं। मैंने अर्चना से कहा ठीक है जब तुम छुट्टी लेने वाली हो तो मुझे कुछ दिन पहले बता देना ताकि मैं भी अपने हिसाब से टाइम मैनेज कर पाऊं। अर्चना ने कहा ठीक है मुझे भी कोई आपत्ति नहीं है तुम यदि मुझसे मिलना चाहते हो तो मुझे तुमसे मिलने में कोई भी परेशानी नहीं है। मैं अर्चना से फोन पर ज्यादा बात नहीं करता था क्योंकि मेरी फोन पर बात करने की आदत नहीं है, मैं अपना फोन कम ही इस्तेमाल करता हूं। जब अर्चना से मेरी मुलाकात होने वाली थी तो उसके कुछ दिन पहले उसने मुझे फोन कर दिया था और कहा कि मैं अब अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ले रही हूं यदि तुम मुझसे मिलो तो मुझे अच्छा लगेगा। मैंने भी अर्चना से मिलने का पूरा निर्णय कर लिया था और मैं जब अर्चना से मिलने वाला था तो उस दिन मैं ही उसके घर उसे रिसीव करने के लिए गया, मैंने अर्चना को उसके घर से रिसीव किया।

उसने उस दिन वाइट कलर का सूट पहना हुआ था और वह और सूट में बड़ी अच्छी लग रही थी। अर्चना के नैन नक्श तो बहुत ही अच्छे हैं और मुझे उसके साथ शादी करने में कोई भी आपत्ति नहीं है लेकिन मैं चाहता हूं कि मैं जिसके साथ भी जीवन बताऊं मैं उसे थोड़ा बहुत समझ पाऊँ इसीलिए मैंने अर्चना को कहा कि तुम मुझसे मिल लो। जब वह मेरे साथ कार में बैठी तो मुझे अर्चना के साथ बैठना अच्छा लग रहा था और हम दोनों कार में थोड़ी बहुत बातें कर रहे थे। मैं अर्चना को एक रेस्टोरेंट में ले गया, जब हम दोनों रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे तो कुछ देर तक तो हम दोनों ने एक दूसरे से बात की पहल नहीं की लेकिन मुझे लगा कि अब कुछ ज्यादा ही शांत माहौल बन रहा है इसलिए मैंने ही अर्चना से बात की और उसे पूछा क्या मैं तुम्हें अच्छा लगता हूं, अर्चना ने मुझे जवाब दिया हां तुम मुझे अच्छे लगते हो, मुझे तुमसे कोई भी दिक्कत नहीं है तुम एक अच्छी जॉब पर भी हो और तुम्हारा फैमिली बैकग्राउंड भी अच्छा है। जब अर्चना ने मुझे यह बात कही तो मुझे थोड़ा खुशी मिली, मैंने उस दिन अर्चना से पूछ लिया कि क्या तुम्हारी जिंदगी में कोई है तो नहीं,  वह मुझे कहने लगी यदि मैं तुम्हें सच कहूंगी तो शायद तुम्हें बुरा लगेगा। मैंने अर्चना से कहा तुम मुझसे बिल्कुल खुलकर बता सकती हो यदि मुझे बुरा लगा तो तुम मुझसे बात मत करना। अर्चना ने मुझे बताया कि उसका एक बॉयफ्रेंड है और उसके साथ ही उसका अब तक रिलेशन चल रहा है लेकिन अर्चना भी उसको छोड़ना चाहती है। अर्चना मुझसे कहने लगी मुझे यह भी पता है कि तुम्हारे मम्मी-पापा मुझे बहुत पसंद करते हैं और मेरी मम्मी पापा भी तुमसे मेरा रिश्ता करवाना चाहते हैं लेकिन मैंने अपने बॉयफ्रेंड को समझाने की बहुत कोशिश की परंतु वह बिल्कुल भी समझने को तैयार है, मैं भी चाहती हूं कि मैं तुम्हारे साथ रिलेशन में रहूं और हम दोनों ही अब एक दूसरे के साथ आगे जीवन बताएं क्योंकि तुम मैच्योर भी हो और तुम मेरी बातों को भी समझते हो। मैंने अर्चना से कहा तो तुम उसे क्यों नहीं समझाती, वह कहने लगी मैंने उसे बहुत समझाया लेकिन हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी समय से रिलेशन में थे इसलिए वह मुझे नहीं छोड़ पा रहा है, मैंने उसे कई बार समझाने की कोशिश की परंतु हम दोनों के हमेशा झगड़े होते हैं, मैं नहीं चाहती कि तुम पर इसका गलत असर पडे।

मैंने अर्चना को कहा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो, मैं तुम्हारा पूरा साथ दूंगा, मुझे बहुत खुशी है कि तुमने मुझसे खुलकर बात की। उसने मुझे अपने बारे में सब कुछ सच बता दिया था इसलिए मेरी नजरों में अर्चना की इज्जत और भी ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैं अर्चना के फैसले से खुश था और मुझे अब कोई भी दिक्कत नहीं थी, मैं जो चीज अर्चना के साथ क्लियर करना चाहता था, वह सब मैंने उससे पूछ लिया था। मैंने अर्चना से कहा कि तुमने अभी तक कुछ ऑर्डर नहीं किया, फिर अर्चना ने हीं आर्डर दिया। जब हम दोनों ने अपना खाना खत्म कर लिया तो उसके बाद हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे के साथ ही बैठे रहे। मैंने जब अर्चना का हाथ पकड़ा तो उसे भी कोई आपत्ति नहीं थी, हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे। मैंने अर्चना से पूछा कि क्या तुमने कभी अपने बॉयफ्रेंड के साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं। उसने मुझे कहा मैने पहले अपने बॉयफ्रेंड के साथ काफी समय तक सेक्स किया। मैं भी अर्चना के साथ सेक्स करने के लिए उतारू था मैंने उसे कहा क्या आज हम लोग कहीं बाहर रुक सकते हैं। अर्चना कहने लगी ठीक है मैं अर्चना को एक होटल में ले गया, वहां पर हम दोनों ही रुक गए।

जब अर्चना मेरे साथ बैठी हुई थी तो मैं उसके हाथों को पकड़ रहा था और कुछ देर बाद हम दोनों के शरीर से एक अलग प्रकार की गर्मी निकालने लगी। मैंने अर्चना के होठों को किस कर लिया जब मैंने उसके होठों को किस किया तो वह भी अपने आप को नहीं रोक पाई उसने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया। हम दोनों ही एक दूसरे को काफी समय तक स्मूच करते रहे जब हम दोनों किस करके संतुष्ट हो गए तो मैंने अर्चना से कहा तुम अपने कपड़े खोल दो। उसने मुझे कहा कि तुम ही मेरे कपड़े उतार दो मैंने जब उसके सूट को उतारा तो उसने अंदर से पिंक कलर की पैंटी और ब्रा पहनी हुई थी जिसमें कि वह किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। मैंने उसकी ब्रा को खोला जब मैंने उसके मुलायम और गोरे स्तनों को अपने मुंह में लिया तो वह बड़ी खुश हो गई। मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक चूसा जिससे कि वह पूरी उत्तेजित हो गई। मैंने जब उसकी पैंटी के अंदर से उसकी योनि के अंदर उंगली डाली तो वह पूरी मूड में हो चुकी थी मैंने उसकी पैंटी को उतार दिया। उसके हिप्स बहुत बड़े बड़े थे मैंने जैसे ही अपने लंड को अर्चना की योनि के अंदर डालने की कोशिश की तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा उसकी चूत पूरी गिली हो चुकी थी। मैंने जैसे ही धक्का मारा तो उसकी योनि के अंदर  मेरा लंड चला गया मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और अपने मुंह से आवाज निकालने लगी। उसकी चूत से पानी निकल रहा था और मैं भी बड़ी तेज गति से उसे धक्के मारने का प्रयास करने लगा। मैंने उसे इतनी तेज गति से चोदा कि वह पूरे मूड में आ गई और वह मेरा पूरा साथ देने लगी। मैंने उसे काफी देर तक सेक्स किया, जब मेरा वीर्य पतन हो गया तो मैं उसे पकड़ कर लेट गया। जिस प्रकार से उसने मेरी इच्छा पूरी की मुझे लग गया कि यह मेरी पत्नी बन सकती है। उस दिन हम दोनों रात भर सेक्स करते रहे, उसने मुझे उस दिन खुश कर दिया। जब भी हम दोनों की मुलाकात होती है तो मैं उसे सिर्फ सेक्स की उम्मीद रखता हूं और हम दोनों ही एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे से संभोग करते हैं, मैं कभी भी कोई मौका नहीं छोड़ता।

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कम उम्र के युवक के साथ सेक्स | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/kam-umra-ke-yuvak-ke-sath-sex/ Thu, 08 Nov 2018 15:36:49 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2592 hindi sex stories, antarvasna

मेरा नाम लता है मैं जबलपुर की रहने वाली हूं। मेरे पति के देहांत को काफी वर्ष हो चुके हैं और जब से उनका देहांत हुआ है मैंने अपने लड़के की देखभाल ख़ुद ही की है। मेरा लड़का अब कॉलेज में चला गया है उसका नाम रोशन है। वह बचपन से ही पढ़ने में बहुत अच्छा है इसलिए मैंने हमेशा ही उसकी पढ़ाई पर बहुत जोर दिया है, मैं चाहती हूं कि वह एक अच्छे मुकाम को हासिल करें और अपने जीवन में अपनी सफलताओं को हासिल कर इसीलिए मैंने रोशन की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया है। एक बार मैं रोशन के कॉलेज में गई तो उसके कॉलेज में मेरी मुलाकात उसके प्रोफ़ेसर से हो गई, उनका नाम राकेश है,  उनकी उम्र 35 वर्ष के आसपास है लेकिन उनकी बातों से मैं इतनी ज्यादा प्रभावित हुई की उस दिन मैंने उनका नंबर ले लिया और मैंने जब उनका नंबर लिया तो मुझे नहीं पता था कि हम दोनों की बातें इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी की राकेश भी मेरी तरफ आकर्षित हो जाएंगे।

वह मुझ पर शादी के लिए दबाव बनाने लगे लेकिन मैं उनके साथ शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि रोशन को यह बात बहुत बुरी लगती और यदि मैं इस उम्र में आकर शादी करती तो कहीं ना कहीं सब लोग मुझ पर ही लांछन लगाते और मुझे ही गलत ठहराते इसलिए मैंने राकेश से बात की और कहा कि आप फिलहाल हमारी शादी के बारे में भूल जाइए, यदि मैं रोशन को अच्छे से समझा पाई तो शायद हम दोनों शादी कर पाएंगे। हम दोनों की मुलाकात को अभी कुछ ही समय हुआ है लेकिन वह मेरी हर बातों का ध्यान रखते हैं और मुझे राकेश के साथ अपना जीवन बिताने में कोई भी आपत्ति नहीं है लेकिन मैं पहले रोशन को समझाना चाहती हूं उसके बाद ही मैं राकेश के साथ शादी के लिए तैयार हो पाऊंगी। मेरी बातों को राकेश भी बहुत अच्छे से समझ गए और उन्होंने भी मेरे निर्णय को स्वीकार किया। राकेश ने भी शादी का कोई निर्णय नहीं किया था और जब उनकी मुलाकात मुझसे हुई तो उन्होंने शादी का निर्णय ले लिया, मुझे नहीं पता कि उन्होंने मुझ में ऐसा क्या देखा लेकिन उनकी उम्र मुझसे 10 वर्ष छोटी है इसलिए मुझे थोड़ा डर लग रहा था।

राकेश ने मुझे बहुत हिम्मत बंधाई और कहा कि आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए यदि हम दोनों शादी कर लेंगे तो मुझे आपके साथ रहने में कोई भी आपत्ति नहीं है, मैं रोशन को भी एक्सेप्ट करने को तैयार हूं। मुझे राकेश के विचार और उनकी बातें बहुत ही पसंद आती हैं, मैं जब भी राकेश के साथ बैठी होती हूं तो वह मुझे अपनी बातों से बहुत ही हंसाते हैं और मुझे भी बड़ा अच्छा लगता है जब मैं उनके साथ समय बिताती हूं। मैंने अब तक यह बात रोशन को नहीं बताई थी इसीलिए मैं उनसे चुपके से मिलती थी और मैंने अपने रिश्ते को भी किसी के सामने नहीं आने दिया था। मैं अपने पति की जगह पर ही नौकरी करती हूं, उनके देहांत के बाद मुझे ही उनकी जगह नौकरी मिल गई। एक दिन राकेश ने मुझे फोन किया और कहने लगे आज मैं आपसे मिलना चाहता हूं क्योंकि काफी समय हो चुका है हम दोनों को एक दूसरे से मिले हुए। हम लोग सिर्फ फोन पर ही बात करते हैं, मैंने राकेश से कहा कि आज तो मैं आपसे नहीं मिल पाऊंगी क्योंकि रोशन घर पर आ चुका है, मैं आपसे कल मिल लेती हूं। वह कहने लगे कोई बात नहीं आप मुझसे कल मिल लेना, आपको जब भी समय मिले तो आप मुझे फोन कर देना, मैं आपसे मिलने के लिए आ जाऊंगा। मैंने अगले दिन जब राकेश को फोन किया तो वह कहने लगे हम लोग कहीं बाहर मिलते हैं, मैंने उनसे कहा कि नहीं आप घर पर ही आ जाइए कुछ देर आप रोशन के साथ भी समय बिताएंगे तो वह भी आपको अच्छे से समझ पाएगा इसीलिए राकेश घर पर आ गए, उस समय रोशन भी घर पर था। जब वह रोशन के साथ बैठे हुए थे तो मैं यह देखकर बहुत खुश हो रही थी कि वह रोशन के साथ कितना अच्छा समय बिता रहे हैं और रोशन को भी एक पिता का सहारा मिल रहा है। राकेश ने रोशन के साथ काफी देर तक समय बिताया। मैं जब राकेश के साथ बैठी हुई थी तो मैं राकेश से कहने लगी कि क्या तुम वाकई में रोशन और मुझे एक्सेप्ट करने को तैयार हो, वह कहने लगे इसमें कोई भी दोहराए नहीं है मैं तुम दोनों को एक्सेप्ट करने को तैयार हूं, मुझे कोई आपत्ति नहीं है और ना ही मैं किसी के बारे में सोच रहा हूं, मुझे तो सिर्फ तुम से प्रेम है और मैं तुम्हारे साथ ही जीवन बिताना चाहता हूं।

मैंने उसे उस दिन बहुत ही अच्छे से समझाया और कहा कि मेरी उम्र तुम से 10 वर्ष बड़ी है, यदि तुम मुझसे शादी कर लेते हो तो तुम बहुत ही दुखी रहोगे, तुम्हें तो कोई भी लड़की मिल जाएगी। वह कहने लगे मैंने जितना भी समय तुम्हारे साथ बिताया है मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगा और हम दोनों के खयालात एक जैसे मिलते हैं इसी वजह से मैं तुम्हारी तरफ ज्यादा आकर्षित हो पाया हूं और मुझे तुम्हारे साथ जीवन बिताने में कोई आपत्ति नहीं है, यदि तुम मेरा साथ दो तो मैं तुमसे कल ही शादी करने को तैयार हूं। जब यह बात उस दिन राकेश ने मुझसे कहीं तो मुझे ऐसा लगा कि शायद वह मुझसे बहुत ज्यादा प्रेम करता है और मैं उससे बहुत ही प्रभावित हुई, मुझे भी उसके साथ समय बिताना अच्छा लगता है। उस वक्त रोशन ने मुझसे पूछा कि मम्मी में बाहर जा रहा हूं मैंने उसे बाहर भेज दिया। राकेश और मै घर पर ही थे, राकेश मेरे साथ ही बैठा हुआ था मैंने काफी सालों से किसी के साथ सेक्स नहीं किया था लेकिन उस दिन मेरी इच्छा होने लगी थी। जब राकेश ने मेरा हाथ पकड़ा तो मुझे भी ऐसा लगा हम दोनों को सेक्स करन चाहिए मैंने राकेश सेक्स को लेकर पहल की हम दोनों ही बेडरूम में चले गए। जब राकेश ने मेरे कपड़े खोले तो मैं काफी सालों बाद किसी के सामने नग्न अवस्था में थी। जब राकेश ने मेरे होठों को चुमा तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ। कुछ देर बाद राकेश ने मेरे स्तनों का भी रसपान बड़े ही प्यार से किया मैंने राकेश के मोटे से लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया मुझे ऐसा लगा जैसे कितने सालों बाद मैंने किसी के लंड को अपने मुंह में लिया है और मुझे बड़ा आनंद आ रहा था राकेश का पानी टपकने लगा।

उसने मुझे कहा हम दोनों 69 पोज में बन जाते हैं उसने जैसे ही मेरे मुंह के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं बड़े अच्छे से उसके लंड को चूस रही थी और वह भी मेरी योनि को चाट रहा था। जब मेरी चूत से बहुत पानी बाहर की तरफ निकले लगा तो मैंने उसे कहा अब तुम मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दो। राकेश ने मेरे दोनों पैरो को खोला और धीरे से उसने मेरी योनि पर अपने लंड को टच किया, मैं बहुत ज्यादा मजे में आ गई। जैसे ही राकेश का लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मेरी चीख निकल गई क्योंकि इतने सालों बाद किसी ने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाला था इसलिए मैंने भी उसका पूरा साथ दिया और अपने दोनों पैरों को मैंने चौड़ा कर लिया। वह जिस प्रकार से मुझे झटके देता मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कितने समय बाद मेरी इच्छा पूरी हो रही है मैं उसका पूरा साथ दे रही थी, राकेश का वीर्य गिरने वाला था उसने मेरे स्तनों पर अपने वीर्य को गिरा दिया। मैंने जब स्तनों से उसके वीर्य को साफ किया तो उसके बाद उसने मुझे उल्टा करते हुए मेरी गांड के अंदर उंगली डालनी शुरू कर दी ऐसा करते करते उसने मेरी गांड के अंदर अपने मोटे लंड को डाल दिया। जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी गांड के अंदर गया तो मैं दर्द से कराहाने लगी लेकिन मुझे अच्छा भी महसूस हो रहा था। मैंने उसके लंड से अपनी गांड को टकराना शुरू कर दिया और बड़ी ही तेजी से मैं भी उसकी तरफ अपनी गांड को धकेलने लगी। वह बड़े मूड में था और मुझे भी बड़ी तेज गति से वह झटके दे रहा था जिस प्रकार से उसने मुझे झटके दिए मैं तो बिल्कुल ही उन झटको को बर्दाश्त नहीं कर पाई। मेरी गांड से ज्यादा गर्मी निकलने लगी जैसे ही राकेश का वीर्य मेरी गांड के अंदर गिरा तो वह मुझे कहने लगा मुझे तो मजा आ गया। हम दोनों ने अभी तक शादी तो नहीं की लेकिन हम दोनों के बीच में सेक्स होने लगा।

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पड़ोस के व्यक्ति का दुख | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/pados-ke-vyakti-ka-dukh/ Wed, 07 Nov 2018 06:07:06 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2590 antarvasna, desi sex stories

मेरा नाम सुरभि है मैं जयपुर में रहती हूं, मेरी उम्र 32 वर्ष है। मेरी शादी को 4 वर्ष हो चुके हैं, मेरे पति विदेश में रहते हैं और वह बहुत कम ही घर आते हैं, मैं उनसे जब भी फोन पर बात करती हूं तो वह मुझे हमेशा कहते हैं कि मैं कुछ समय बाद घर आ जाऊंगा लेकिन उन्हें काफी समय हो चुका है जब से वह घर नहीं आए हैं। मैं कई दिनों से फोन पर बात कर रही थी और मैंने फोन पर बात करते हुए उन्हें कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर जाना चाहती हूं, वह मुझे कहने लगे ठीक है तुम कुछ दिनों के लिए अपने घर हो आओ, मुझे कोई भी आपत्ति नहीं है। मैंने अपने सास-ससुर से पूछ लिया, जब मैंने उनसे पूछा तो वह कहने लगे ठीक है तुम कुछ दिनों के लिए अपने घर हो आओ। मैं अब वहां से अपने मायके चली आई, मेरा माइका  अजमेर के पास है। मैं जब अपने घर आई तो मेरे पिताजी कहने लगे तुम बहुत ही सही समय पर घर आई हो क्योंकि कुछ दिनों बाद तुम्हारे भैया और भाभी जी घर पर आने वाले हैं, मैंने उन्हें कहा कि क्या भैया भाभी भी काफी समय से घर पर नहीं आए हैं, वह कहने लगे हां वह लोग भी काफी समय से घर पर नहीं आए हैं, तुमने बहुत अच्छा किया कि तुम इस वक्त घर पर आ गई।

मैं अपनी मम्मी से मिलकर बहुत खुश थी। कुछ दिनों बाद मेरे भैया भाभी आए तो मैंने उन्हें कहा कि आप लोग तो मुझे काफी समय से मिले भी नहीं है, उन्होंने मेरे पति के बारे में पूछा तो मैंने उन्हें कहा कि वह तो काफी समय से घर भी नहीं आए हैं और मैं उन्हें बहुत मिस करती हूं। मेरी भाभी और मेरी जब बात हो रही थी तो मेरी भाभी मुझसे पूछने लगी तुम्हें तुम्हारे पति की याद नहीं आती, मैंने उन्हें कहा कि मुझे तो उनकी बहुत याद आती है परंतु वह घर ही नहीं आते। मैं अपने भैया और भाभी से मिलकर बहुत खुश थी, उनका एक छोटा लड़का भी है उसकी उम्र 5 वर्ष है। मुझे उसके साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है वह बहुत ही प्यारा है और बहुत शरारत भी करता है। एक दिन मैं उसे लेकर बाहर टहल रही थी तभी आगे से एक लड़का बड़ी तेज स्पीड में बाइक से आ रहा था, मुझे वह आता हुआ नहीं दिखाई दिया, जब उसकी टक्कर मुझसे हुई तो मैं आगे जाकर गिर गई और मैं बेहोश हो गई थी।

जब मेरे भैया और मेरे पापा मुझे अस्पताल ले गए तो उसके बाद मुझे होश आया, मैं जब उठी तो मैंने अपने भैया से कहा कि क्या गोलू ठीक है, गोलू मेरे भैया के लड़के का नाम है। वह कहने लगे गोलू तो ठीक है लेकिन तुम्हें बहुत ज्यादा चोट आ गई थी,   मैंने उन्हें कहा कोई बात नहीं। भैया पूछने लगे कि तुमने उस लड़के को देखा नहीं जिसने तुम्हें टक्कर मारी, मैंने उन्हें कहा मुझे कुछ भी पता नहीं चला वह बड़ी तेज स्पीड में आ रहा था और मैं उससे टकरा गई, उसके बाद वह वहां से भाग गया। मेरे भैया और मेरे पापा बहुत ज्यादा परेशान हो गए थे, मैंने उन्हें कहा आप चिंता मत कीजिए। कुछ देर में डॉक्टर भी आ गए और डॉक्टरों ने मुझे वहां से डिस्चार्ज कर दिया, मैं जब घर पर आई तो कुछ दिनों तक मैं घर पर ही आराम कर रही थी, मैंने अपने पापा से कहा कि यह बात आप मेरे ससुराल वालों को पता मत चलने देना, नहीं तो मेरे पति बहुत चिंतित हो जाएंगे। वह कहने लगे तुम चिंता मत करो हम लोग किसी को भी नहीं बताएंगे। मैं जब घर में लेटी हुई थी तो एक दिन सामने के घर से बहुत तेज आवाज आ रही थी, मैं काफी देर से सुन रही थी, जब मेरी मम्मी रूम में आई तो मैंने उनसे पूछा कि वह कौन लोग हैं जो इतना तेज शोर रहे है, मेरी मम्मी कहने लगी यह पड़ोस में ही रहते हैं  यह लोग बहुत ज्यादा शोर शराबा करते हैं, इन दोनों पति-पत्नी के आपस में बिल्कुल भी नहीं बनती। मैंने उन्हें कहा क्यों इन दोनों की आपस में क्यों नहीं बनती, वह कहने लगी कि ना जाने इन दोनों को आपस में किस बात की दिक्कत है हमेशा ही यह लोग झगड़ा करते रहते हैं, काफी दिनों से इन लोगों का झगड़ा नहीं हुआ था लेकिन आज फिर से इन लोगों के बीच में झगड़ा शुरू हो गया। मुझे भी बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था और मैंने अपनी मम्मी से कहा कि क्या यह लोग इसी प्रकार से चिल्लाते हैं, मेरी मम्मी कहने लगी हां यह लोग इसी प्रकार से चिल्लाते हैं और हमेशा ही यह इसी प्रकार की बातें करते हैं। मैंने उन्हें कहा क्या कोई मोहल्ले में इन्हें बोलता नहीं है, वह कहने लगे कि ऐसे में कौन बीच में जाता है यह इनके आपस का मामला है, सब लोग तो बचने की कोशिश करते हैं।

यह कहते हुए मेरी मम्मी भी रूम से चली गई, मैं रूम में ही बैठी हुई थी और मैंने भी टीवी ऑन कर ली। मुझे भी लगा कि अब कोई फायदा नहीं है इसलिए मैं टीवी देखने लगी और टीवी देखते हुए मुझे नींद आ गई। अगले दिन जब मैं उठी तो मैंने बाहर एक व्यक्ति को जाते हुए देखा, मैंने अपनी मम्मी से पूछा कि क्या यह वही है तो मेरी मम्मी कहने लगी हां यह वही हैं। मैं थोड़ा ठीक हो चुकी थी इसलिए मैं उनके पीछे गई और मैंने उनसे बात की तो वह कहने लगे कि हां हम दोनों पति पत्नी के बीच में बहुत झगड़ा रहता है। मैंने उन्हें कहा कि यहां पर और लोग भी रहते हैं उन्हें भी आपकके झगडो से डिस्टर्ब होता है। जब उन्होंने मुझे पूरी बात बताई तो मैं सुनकर बड़ी दंग रह गई उन्होंने मुझे कहा मेरी पत्नी एक कॉल गर्ल है और वह हर जगह अपना मुंह मारती फिरती है इसलिए मैं अब उससे बिल्कुल भी प्रेम नहीं करता। मुझे उन पर तरस आ रहा था वह उस दिन वह मुझे अपने घर ले गए उन्होंने मुझे अपनी पत्नी की तस्वीर दिखाई। मैं उनके बगल में ही बैठी हुई थी जब उनका हाथ मेरे स्तनों पर लगा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी मैं भी आज अपनी इच्छा पूरी कर लू। हम दोनों की सेक्स को लेकर बातें हुई हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए राजी हो गए।

जब उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतारे तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी मै सोचने लगी आज तो मैं अच्छे से संभोग करती रहूंगी, जैसे ही मैंने उनके लंड को अपने मुंह में लिया तो वह बहुत खुश हो गए और बड़े अच्छे से मैं उनके लंड को सकिंग कर रही थी, मैंने काफी देर तक उनके लंड को सकिंग किया जब उनका पानी बाहर की तरफ निकलने लगा तो मैं अपने आप को नहीं रोक पाई। मैंने अपने दोनों पैर चौडे कर लिए, उन्होंने काफी देर तक मेरे स्तनों का रसपान किया और मेरे स्तनों पर उन्होंने अपने दांतों के निशान भी मार दिए, जब मेरे स्तनों से खून आ गया तो उन्होंने मेरी योनि का भी बहुत अच्छे से रसपान किया। वह काफी समय तक मेरी योनि को चाटते रहे, जब उन्होंने अपने मोटे लंड को मेरी योनि के अंदर डाला मुझे ऐसा लगा जैसे ना जाने कितने दिनों बाद मेरी इच्छा पूरी हो रही हो। उनका लंड मेरी योनि की पूरी गहराई में उतर चुका था, मैंने उन्हें कहा कि आप ऐसे ही मुझे धक्के देते रहिए उन्होंने मुझे बड़ी तेज गति से झटके दिए। वहां इतनी तेजी से मुझे चोद रहे थे उनका लंड मेरी योनि के अंदर तक जाता। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था उनका लंड कही मेरी योनि को फाडते हुए मेरे पेट के अंदर ना चला जाए, काफी देर उन्होंने ऐसे ही मेरे साथ संभोग किया। मैं उनके ऊपर से लेट गई तो उन्होंने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया, मुझे बड़ा मजा आता। मैं भी अपनी चूतडो को उनसे मिलाने लगी और बड़ी तेजी से मैं भी अपनी चूतडो को हिला रही थी लेकिन जब मेरी चूतडे उनके लंड पर लगती तो वह भी ज्यादा समय तक मेरी गर्मी को नहीं झेल पाए। मैं भी झड़ने वाली थी इसलिए मैंने भी अपनी योनि को टाइट कर लिया और वह मुझे बड़ी तेजी से झटके मार रहे थे, जब उनका वीर्य गिरने वाला था तो मैंने उन्हें कहा आप मेरे मुंह के अंदर अपने वीर्य को डाल दीजिए। उन्होंने जैसे ही अपने वीर्य को मेरे मुंह में डाला तो मैंने उनके वीर्य को एक ही झटके में निगल लिया। उस दिन मेरी इच्छा पूरी हुई मैं जितने दिन अपने मायके में रही तो उनके साथ मैने सेक्स का आनंद लिया। हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत सुख दिया।

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गांव में सुंदर कन्या को चोदने का मजा लिया | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/gaanv-me-sundar-kanya-ko-chodne-ka-maja-liya/ Tue, 06 Nov 2018 14:31:15 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2588 antarvasna, hindi sex stories

मेरा नाम राजेंद्र है मैं सरकारी स्कूल में अध्यापक हूं, मैं महाराष्ट्र के एक छोटे से कस्बे में कार्यरत हूं और यहां पर मुझे दो वर्ष हो चुके हैं। मैं जब स्कूल में पढ़ाने आया तो यहां पर पूरी व्यवस्थाएं नहीं थी इसलिए मैं बहुत परेशान हो गया, मैं सोचने लगा मैं कहां पर आ गया हूं लेकिन मैंने हार नहीं मानी और मैंने सोचा कि मुझे कुछ नया करना पड़ेगा। मैं जिस क्षेत्र में था वहां पर ज्यादा पढ़े-लिखे लोग नहीं थे इसीलिए मैंने अपने घर पर फ्री में ट्यूशन पढ़ाने की सोची, मेरे पास स्कूल के बच्चे आते थे और वह लोग मुझसे फ्री में ट्यूशन पढ़ते थे। मैं किसी भी बच्चे से कोई भी पैसा नहीं लेता था जिससे कि उनकी पढ़ाई में भी सुधार होने लगा। मेरे इस कार्य की सब लोग सराहना करने लगे और सब लोग मुझसे बड़े खुश रहने लगे। मैं अब सब लोगों के बीच में चर्चित होने लगा था और सारे लोग मुझे मास्टर जी कह कर बुलाते थे।

मैंने भी बचपन में बहुत ही परेशानियों के बीच में पढ़ाई की थी इसलिए मुझे भी यह ज्ञान था कि यदि मेरी वजह से किसी बच्चे का भला हो जाए तो उसका जीवन सुधार सकता है इसीलिए मैंने यह  फैसला लिया। सब बच्चो को मैं अच्छे से पढ़ाने लगा, जो भी बच्चा मेरे पास आता था वह बहुत ही अच्छे से पढ़ता था। उनके माता पिता मेरे लिए कुछ ना कुछ भिजवा देते लेकिन मुझे वह पसंद नहीं था, उसके बावजूद भी मुझे उनसे लेना पड़ता था क्योंकि वह लोग मुझे कहते कि यदि आप हमारे बच्चों के लिए इतना कुछ कर रहे हैं तो क्या हम आप के लिए इतना भी नहीं कर सकते। एक दिन मैं शाम के वक्त बच्चों को पढ़ा कर बाहर टहलने के लिए निकल रहा था, उस वक्त मैंने देखा कि वहां पर एक महिला और एक पुरुष का झगड़ा हो रहा है, मैं जब उनके पास गया तो वह दोनों एक दूसरे पर बहुत ही बुरी तरीके से चिल्ला रहे थे। मैंने उन दोनों को समझाते हुए शांत करवाया। वह लोग मुझे पहचान चुके थे इसलिए उन लोगों ने मुझे अपने घर में बैठा लिया। जब मुझे पता चला कि वह दोनों पति पत्नी है तो मैंने उन दोनों से पूछा कि तुम दोनों इतना क्यों झगड़ रहे हो तो वह कहने लगे कि मैं अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करता हूं लेकिन उसके बावजूद भी यह हमेशा ही मुझसे झगड़ती रहती है और कहती है कि आप मेरी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

मैंने उन दोनों को अपने पास ही बैठा लिया, मैंने उन दोनों को समझाते हुए कहा कि इसमें तुम दोनों की गलती नहीं है लेकिन यदि तुम इसी प्रकार से करोगे तो तुम्हारे बच्चों पर इसका बहुत ही बुरा असर पड़ेगा और मैंने उन महिला को भी समझाया कि जितना आपके पति कमाते हैं आपको उतने में ही संतुष्टि करनी चाहिए यदि आप ज्यादा के लालच में रहेंगे तो शायद आपके पति पर उस चीज का गलत असर पड़ेगा। वह भी मेरी बातों को समझ गए, उस दिन दोनों ने ही मुझे अपने घर पर रुकने के लिए कहा, मैंने उस दिन उन लोगों के घर पर ही भोजन किया। जब मैं अगले दिन अपने घर पर बैठा हुआ था तो मेरे पास कुछ महिलाएं आ गई और वह कहने लगे कि आप हमें भी थोड़ा बहुत पढ़ा दीजिए क्योंकि हम लोग भी ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं। मुझे उन्हें पढ़ाने में कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए मैंने उन्हें भी पढ़ाना शुरू कर दिया और जब मैंने उन्हें पढ़ाना शुरू किया तो मुझे बहुत ही मेहनत करनी पड़ रही थी क्योंकि उन लोगों ने काफी समय पहले ही स्कूल छोड़ दिया था इसी वजह से मुझे उन्हें पढ़ाने में बड़ी दिक्कत हो रही थी। उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और मैंने उन्हें पढ़ाने की पूरी कोशिश की। मैं अब उन्हें हमेशा ही शाम के वक्त पढ़ता था। गांव में मेरी सब लोग इज्जत करते थे। एक दिन मैं स्कूल से लौट रहा था, उस वक्त मुझे एक लड़की ने रोक लिया, वह लड़की दिखने में बहुत ही अच्छी लग रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी शहर की रहने वाली है। जब वह मेरे पास आई तो उसने मुझे अपना परिचय दिया, उसका नाम शीला है। मैंने शीला से पूछा क्या आपको मुझसे कुछ काम था, वह मुझे कहने लगे मुझे यहां लोगों से पता चला कि आप लोगों के लिए यहां पर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और उन्हें पढ़ा भी रहे हैं। मैंने शीला से कहा हां मैं उन्हें पढ़ाता हूं। शीला ने मुझे बताया कि मैं भी इसी गांव की रहने वाली हूं और मैं मुंबई में रहती हूं लेकिन मैं भी इसी गांव में रहकर कुछ करना चाहती हूं, मैंने उसे कहा कि क्यों ना फिर तुम यहां पर कोई ट्यूशन सेंटर खोल दो, मैं बच्चों को निशुल्क पढ़ाता हूं।

तुम भी यदि उन्हें पढ़ाओ तो तुम्हें भी अच्छा लगेगा। वह कहने लगी हां मैं भी यही सोच रही थी। उसने एक घर किराए पर ले लिया और वहां पर ही हम दोनों बच्चों को और महिलाओं को पढ़ाते थे। शीला एक बहुत ही अच्छी और समझदार लड़की है और मेरी नजरों में उसकी बहुत इज्जत है क्योंकि वह अपने गांव के लिए बड़ा अच्छा काम कर रही थी। एक दिन खाली वक्त में हम दोनों बैठे हुए थे, शीला मुझसे पूछने लगी कि क्या आपकी शादी हो चुकी है, मैंने उसे बताया कि मेरी शादी तो हो चुकी थी लेकिन मेरी पत्नी के साथ मेरा डिवोर्स हो गया है क्योंकि हम दोनों के विचार एक दूसरे से बिल्कुल भी नहीं मिलते इसीलिए हम दोनों ने अलग रहने का फैसला कर लिया है। उसके बाद शीला ने मुझसे कुछ भी नहीं पूछा। हम दोनों में बहुत ही अच्छी दोस्ती होने लगी थी एक दिन शीला मेरे साथ मेरे घर पर बैठी हुई थी उस दिन वह खाना बना रही थी। जब हम दोनों साथ में बैठ कर  बात कर रहे थे तो वह मुझसे चिपक रही थी, मुझे नहीं पता कि उस दिन उसके दिल में क्या चल रहा था लेकिन मुझे उसके साथ बैठना बड़ा अच्छा लग रहा था। मैंने जब शीला की जांघों पर हाथ रखा तो मुझे ऐसा लगा जैसे वह मुझसे कुछ चाहती हो। मैंने शीला के होठों पर अपने हाथ को रखा तो वह अपने आप ही नीचे लेट गई।

मैंने उसके नरम और गुलाबी होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया उसके होठों से खून भी निकलने लगा। मैंने उसके स्तनों को दबाते हुए उसके सारे कपड़े उतार दिए जब मैंने उसके गोल मटोल स्तनों को देखा तो मैं बिल्कुल भी नहीं रह पाया और मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया मैंने शीला के स्तनों से खून भी निकाल दिया था, उसके स्तनों पर मैंने लव बाइट भी दी थी। मैंने शीला की योनि पर अपनी जीभ से टच किया तो वह बड़ी है मादक आवाज में सिसकियां ले रही थी, मैंने भी तुरंत अपने लंड को शीला की योनि पर लगा दिया उसकी योनि बहुत गर्म हो रखी थी। मैंने जैसे ही उसकी नरम और मुलायम योनि के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया तो उसकी योनि से खून निकल रहा था और वह दर्द से कराह रही थी लेकिन मैंने भी धीरे धीरे उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल ही दिया। जैसे ही मेरा लंड शीला की योनि के अंदर घुसा तो उसकी योनि से खून की धार बाहर की तरफ निकल आई और उसकी योनि पूरी तरीके से छिल चुकी थी। मुझे उसकी टाइट चूत मारने में बड़ा आनंद आ रहा था, मैंने उसे किस करते हुए बड़ी तेज गति से चोदना शुरू कर दिए। मैं उसे झटके मारता तो वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी, मुझे उसे चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। शीला मुझे कहने लगी आपके साथ तो मुझे सेक्स कर के बहुत मजा आ रहा है और आज आपने मेरी जवानी को सफल बना दिया। मेरा वीर्य शीला की योनि में गया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ जब मैंने उसको उल्टा किया तो उसकी बड़ी गांड के अंदर से मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर घुसा दिया और उसे झटके देने लगा। मैंने उसे बड़ी तेजी से चोदना शुरू किया जिससे की उसकी बड़ी बड़ी चूतडे मुझसे टकराती तो मेरे अंदर से सेक्स को लेकर एक अलग ही प्रकार का जोश पैदा हो जाता। मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदना प्रारंभ किया मैंने उसे इतनी देर तक चोदा की उसकी योनि से खून निकल ही रहा था लेकिन मेरा भी पूरा लंड छिल चुका था, जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो वह बहुत ही खुश हो गई।

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सहेली के पति ने मुझे सम्मोहित कर दिया | rukami-svoimi.ru //rukami-svoimi.ru/saheli-ke-pati-ne-mujhe-sammohit-kar-diya/ Mon, 05 Nov 2018 10:44:41 +0000 //rukami-svoimi.ru/?p=2576 kamukta, antarvasna

मेरा नाम रागिनी है मैं बुलंदशहर की रहने वाली हूं,  मेरी शादी को एक वर्ष हुआ है और मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके जा रही थी। मेरा मायका मेरठ में है, मैं जब बस से जा रही थी तो उसी बस में मेरे ठीक पीछे मेरी सहेली काजल बैठी हुई थी, काजल ने काफी देर तक तो मुझे कुछ भी नहीं कहा उसने मुझे काफी पहले ही देख लिया था। थोड़ी देर बाद जब काजल ने मुझे आवाज दी तो मैंने भी उसकी तरफ देखा, मैं उसको देखकर बहुत खुश हो गयी,  उसके साथ में एक युवक भी बैठा हुआ था, मुझे उस वक्त पता नहीं चला कि वह कौन है लेकिन जब मैं काजल के पास गई तो काजल ने मुझे अपने पति से मिलवाया, उसके पति का नाम प्रताप है। काजल की शादी मेरठ में ही हुई है और वह कॉलेज में मेरे साथ पढ़ती थी।

वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त है लेकिन मैं उसकी शादी में नहीं जा पाई क्योंकि उस वक्त मेरे पिताजी की तबीयत खराब हो गई थी इसीलिए हम लोग उस वक्त हॉस्पिटल में ही थे। काजल की शादी मुझसे पहले हो चुकी थी, उसकी शादी को दो वर्ष हो चुके हैं। मैं जब काजल से मिली तो मैं बहुत ही खुश हो गई, काजल ने मुझे कहा कि तुम यहीं बैठ जाओ, मैं उसके पास ही बैठ गई और जो लड़का उनके साथ बैठा हुआ था उसे मैंने अपनी सीट पर भेज दिया था। काजल मुझसे मिलकर बहुत खुश थी और मैं भी उसे इतने समय बाद मिल रही थी इसलिए मुझे भी अच्छा लग रहा था। जब मैं उसके साथ बैठी हुई थी तो हम लोग अपने कॉलेज के दिन याद कर रहे थे, मैं सोचने लगी कॉलेज के दिन कितने अच्छे थे और वहां पर हम लोग कितना इंजॉय करते थे। काजल मुझे कहने लगी कॉलेज में तो हम लोगों ने बड़े इंजॉय किए हैं और वहां पर हम लोग कितने अच्छे से रहते थे। मैंने काजल से कहा परंतु अब वह बहुत पुरानी बात हो चुकी है।

उसके बाद मेरे पिताजी का जिक्र आया ओ काजल पूछने लगी तुम्हारे पिता की तबीयत कैसी है, मैंने उसे कहा मेरे पिताजी की तबीयत तो ठीक है। काजल के पति बोर हो रहे थे, वह अपने फोन पर ही लगे हुए थे, मैंने काजल से कहा तुम्हारे पति शायद बोर हो रहे हैं और उन्हें हमारी बातें अच्छी नहीं लग रही, उस वक्त उसके पति प्रताप ने भी कहा कि नहीं ऐसी कोई भी बात नहीं है, मैं बिल्कुल भी बोर नहीं हो रहा, आप लोग अपनी पुरानी बातें कर रहे हो। प्रताप बहुत ही सीधे किस्म के व्यक्ति लग रहे थे, मैंने काजल से पूछा कि प्रताप और तुम्हारा रिलेशन कैसे चल रहा है,  कुछ देर तो काजल ने मुझसे कहा कि हमारे रिलेशन तो अच्छा ही चल रहा है लेकिन थोड़ी देर बाद उसके पति कहने लगे हम लोग एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं और मुझे काजल जैसी जीवन साथी मिली तो मैं अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझता हूं। काजल भी मुझसे मेरे पति के बारे में पूछने लगी, मैंने भी अपने पति के बारे में काजल को बताया, काजल मेरी शादी में तो आई थी लेकिन उसके पति उस वक्त मेरी शादी में नहीं आ पाए थे। मैंने काजल से कहा मेरे पति बहुत ही अच्छे हैं और वह अपने काम से थोड़ा बहुत समय मेरे लिए निकाल लिया करते हैं। जब हम लोग मेरठ पहुंच गए तो मैंने काजल से कहा ठीक है मैं भी अपने घर चलती हूं और कुछ दिनों तक मैं यहीं पर हूं तो तुम्हें जब वक्त मिले तो तुम मुझसे मिल लेना। उसके पति प्रताब कहने लगे हां काजल वैसे भी घर पर अकेली ही रहती है और घर में बोर हो जाया करती है तो वह तुमसे मिलने आ जय करेगी, मैं ही ऑफिस जाते वक्त उसे तुम्हारे घर पर छोड़ दूंगा। मैंने प्रताब से कहा तुम जरूर काजल को कल मेरे घर पर छोड़ देना और यह कहते हुए मैंने भी वहां से ऑटो लिया और उसके बाद मैं अपने घर चली गई, जब मैं अपने घर पहुंची तो मेरे माता-पिता मुझे देख कर खुश हो गए और कहने लगे तुम काफी दिनों बाद घर आ रही हो, हम लोगों ने तो सोचा भी नहीं था,  तुमने तो हमें सरप्राइज दे दिया। मेरी मम्मी थोड़ा कम बात करती हैं परंतु मेरे पिताजी बहुत ही मजाकिया किस्म के व्यक्ति हैं, हालांकि उनका ऑपरेशन हुआ है परंतु उसके बावजूद भी वह एक जिंदादिल इंसान हैं और सबको बहुत हंसाते रहते हैं। मेरे भैया भी दिल्ली में जॉब करते हैं और उनकी पत्नी भी उन्ही के साथ में रहती हैं, वह हर शनिवार और इतवार के दिन घर आ जाते हैं या कभी कभार मेरे माता-पिता भी दिल्ली उनके पास रहने के लिए चले जाते हैं। मेरे भैया ने दिल्ली में ही आप फ्लैट खरीद लिया है।

मेरी मम्मी मुझसे पूछने लगी तुम्हारे पति और तुम्हारे ससुराल वाले कैसे हैं,  मैंने उन्हें कहा वह सब लोग बहुत अच्छे हैं मैं काफी देर तक अपने माता-पिता के साथ बैठी रही। शाम को मैंने अपनी मां के साथ ही उनकी खाना बनाने में मदद की, जब मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी तो मैं अपनी कुछ पुरानी तस्वीरें देख रही थी और मैंने उस वक्त काजल को भी मैसेज कर दिया, काजल भी पुरानी तस्वीरें देखकर बहुत खुश हो रही थी और कहने लगी याह तो हमारी कॉलेज की तस्वीरें हैं तुमने अब तक यह अपने पास संभाल कर रखी है। मैंने उसे कहा मैंने अब तक वह अपने पास संभाल कर रखी हैं क्योंकि यह तो यादगार लम्हे थे,  मैं तो अपने कॉलेज के दिन बहुत ही मिस करती हूं और तुम सब लोगों को भी बहुत मिस करती हूं। काजल मुझे अपने फोन से नंगी तस्वीर भेजने लगी। मुझे समझ नहीं आया कि वह ऐसा क्यों कर रही है क्योंकि वह ऐसा नहीं कर सकती। जब मैंने उसे फोन किया तो उसके पति ने फोन उठाया वह मुझे कहने लगा मैं तुम्हें देख कर आज पागल हो गया तुम्हारे यौवन का मैं दीवाना हो चुका हूं। मैंने उससे कहा तुम्हारा दिमाग तो सही है लेकिन उसने भी मुझे अपनी बातों से सम्मोहित कर लिया और मैंने प्रताप को कहा कि ठीक है कल तुम मुझे चोदने के लिए आ जाना मेरी चूत तुम्हें देख कर फडफडा रही है।

वह अगले दिन मेरे घर पर आ गया उस दिन मेरे माता पिता कहीं बाहर गए हुए थे मैं घर पर अकेली ही थी। जब प्रताप आया तो उसने कुछ देर मुझसे बैठ कर बात की। उसने जब मुझे कसकर पकडा तो उसने मेरी साड़ी के अंदर से मेरी योनि के अंदर हाथ डाला दिया मेरी योनि ने पानी छोड़ दिया था वह बड़ी तेजी से मेरी योनि को दबाने लगा। उसने मेरे स्तनों को भी दबाना शुरू कर दिया मैंने अपने ब्लाउज को खोल दिया। जब उसने मेरे बड़े बड़े स्तनों को अपने मुंह में लिया तो वह बड़े अच्छे से मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था वह मेरे निप्पल को चूसने लगा। मैंने उससे कहा तुम तो बड़े ही मादरचोद हो तुम शरीफ बनने का ढोंग कर रहे थे। मेरी चूत मे खुजली थी इसीलिए मैंने तुम्हें बुलाया जब उसने मुझे अपने नीचे लेटाया तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं सिर्फ प्रताप की हूं। उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया और मेरे चूत को चाटने लगा उसने मेरी योनि को इतने अच्छे से चाटा कि मेरा पूरा पानी उसने बाहर की तरफ निकाल दिया। कुछ देर तक उसने मुझसे अपने लंड को सकिंग भी करवाया जब उसकी इच्छा पूरी हो गई तो उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही उसका लंड मेरी योनि के अंदर घुसा तो मैं चिल्ला रही थी और अपने मुंह से गरमा गरम सिसकियां ले रही थी। वह मुझे कहने लगा तुम्हारी चूत तो अभी भी बहुत टाइट है क्या तुम्हारे पति तुम्हें नहीं चोदता। मैंने उसे कहा मेरे पति तो हमेशा ही मुझे चोदता है लेकिन उनका लंड तुम्हारे जितना मोटा नहीं है। उसने मुझे उल्टा लेटा दिया और जैसे ही उसका लंड मेरी योनि के अंदर घुसा तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेज गति से वह मुझे झटके देने लगा। वह मुझे इतनी तेज गति से धक्के मार रहा था कि मैं भी उसकी तरफ अपनी चूतड़ों को मिलाने लगी। मेरी बड़ी बड़ी चूतडे जब उससे टकरा रही थी तो उनसे फच फच की आवाज निकल रही थी। प्रताप मुझसे कहने लगा मैं ज्यादा समय तक तुम्हारे साथ सेक्स नहीं कर पाऊंगा क्योंकि तुम्हारा यौवन देखकर मेरा झडने वाला है। जब वह झडने वाला था तो उसने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और मेरी बड़ी पहाड़ जैसी चूतड़ों पर उसने अपने सफेद वीर्य की धार को गिरा दिया।

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